2015 में गणतंत्र दिवस की परेड में पहली बार सीआरपीएफ के कोबरा कमांडो राष्ट्र के सामने आए थे। कोबरा यूनिट का गठन करने से पहले यूएस मेरिन कमांडो, उनकी ट्रेनिंग, वर्किंग स्टाइल, सर्जीकल स्ट्राइक और दूसरे कई तरह के ऑपरेशन की जानकारी ली गई। इन सबके बाद ही कोबरा यूनिट स्थापित हुई थी। यह विशिष्ट कमांडो फोर्स जंगल में बिना किसी मदद के 11 दिनों तक लड़ सकती है। इसी वजह से कोबरा विश्व में पहले स्थान पर है।
नक्सलियों, आतंकियों से लड़ने और दूसरे बड़े ऑपरेशनों के लिए इस विशिष्ट फोर्स को खास तरह की ट्रेनिंग दी गई है। हथियार, वर्दी एवं तकनीकी उपकरणों के मामले में भी 'कोबरा' दूसरे सभी बलों से पूरी तरह अलग है। बिना किसी मदद के लगातार डेढ़ सप्ताह तक जंगलों में लड़ते रहना इस फोर्स की खासियत है।
बता दें कि अलकायदा सरगना लादेन को मार गिराने वाले यूएस मरीन कमांडो बिना किसी मदद के जंगल में लगातार तीन रातों तक लड़ सकते हैं। दूसरी ओर कोबरा के हर जवान को ट्रेनिंग के दौरान सात दिन तक जंगल में लड़ने की परीक्षा पास करना जरूरी है। कई साल पहले कोबरा ने सारंडा (झारखंड) के घने जंगलों में 11 दिन तक बिना किसी मदद के एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया था।
चूंकि कोबरा को बाहर से कोई मदद नहीं मिलती, इसलिए इन्हें खास प्रशिक्षण दिया जाता है। मैगी जैसी कोई खाद्य सामग्री इन्हें प्रदान की जाती है। पानी की बोतल को झरने या तालाब से भरना पड़ता है। खाने का सामान खत्म हो जाता है, तो जंगली सामग्री से काम चलाना पड़ेगा। जवानों को ट्रेनिंग में कई जंगली वनस्पतियों की जानकारी दी जाती है। कोबरा कमांडो अपने जूते और वर्दी एक मिनट के लिए भी नहीं उतारते।
सीआरपीएफ मुख्यालय में आईजी 'इंटेलीजेंस' पीके सिंह बताते हैं, वीवीआईपी सुरक्षा के लिए जवानों को नोएडा में ट्रेनिंग दी जाती है। दो माह की प्री-इंडक्शन ट्रेनिंग में जवानों को वीवीआईपी सुरक्षा, भवनों या किसी विशेष स्पॉट की हिफाजत से संबंधित हर बारीकी से अवगत कराया जाता है। इस दौरान जवानों को कई तरह की परीक्षा पास करनी होती है। उसके बाद ही उन्हें वीवीआईपी सुरक्षा यूनिट का हिस्सा बनाया जाता है। हमारे जवानों की खासियत है कि ये किसी भी परिस्थिति में काम कर सकते हैं।
चूंकि पूरे देश में सीआरपीएफ के सेंटर हैं, इसलिए जवानों को हर राज्य की जानकारी मिलती रहती है। वे सुरक्षा की बारीकियों को अच्छे से समझने लगते हैं। सीआरपीएफ की कोबरा या दूसरी यूनिट्स के बहादुर जवान एसपीजी और एनएसजी में जाते रहते हैं। वहां से वापस लौटने वाले कई जवानों को वीवीआईपी सुरक्षा यूनिट में भेज दिया जाता है।