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Air Pollution: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- बंद हो फसल अवशेष जलाना, प्रदूषण रोकने के लिए न्यायिक निगरानी जरूरी

Wed, 13 Dec 2023 06:56 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Air Pollution: सर्वोच्च न्यायालय ने वायु प्रदूषण को लेकर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि फसल अवशेषों को जलाना बंद होना चाहिए, ताकि लोगों को अगली सर्दी के मौसम में इस तरह की स्थिति का सामना न करना पड़े। इसके अलावा, अदालत ने राज्य सरकार को इसे रोकने के प्रयास में कार्य योजना लागू करने को कहा। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि उन फसल अवशेषों को जलाना बंद होना चाहिए, जो दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं, ताकि लोगों को हर सर्दी के मौसम में एक जैसी स्थिति का सामना न करना पड़े। अदालत ने इसे सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक निगरानी की जरूरत पर जोर दिया। 

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वायु प्रदूषण से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रही थी पीठ
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने पाया कि अब भी खेतों में पराली जलाए जाने की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने संबंधित राज्य सरकारों को प्रदूषण रोकने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत दिल्ली-एनसीआर में साल दर साल सर्दियों के दौरान गंभीर वायु प्रदूषण से जुड़े एक मामले पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने कहा, कम से कम अगली सर्दियों के लिए थोड़ा बेहतर करने का प्रयास करें।

दो महीने के भीतर पेश करनी होगी रिपोर्ट
पीठ ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति की कई बैठकें हुई हैं। उसने इस मुद्दे से निपटने के लिए पंजाब और हरियाणा सहित राज्यों के लिए कार्य योजना तैयार की है। पीठ ने कहा कि संबंधित राज्यों को कार्य योजनाओं को लागू करना होगा। दो महीने के भीतर अदालत के समक्ष प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी।

पीठ ने कहा, 'हम राज्य सरकारों को निर्देश देते हैं कि वे इस संबंध में कदम उठाएं। दो महीने के भीतर इस अदालत को प्रगति रिपोर्ट सौंपें।' पीठ ने कहा कि अन्य प्राधिकारी भी कार्य योजनाओं को विधिवत रूप से लागू करेंगे और अदालत में रिपोर्ट पेश करेंगे। 
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'मामले की लगातार निगरानी की जरूरत'
न्यायमूर्ति कौल ने कहा, इस मामले में लगातार निगरानी की जरूरत है। होता यह है कि जब समस्या पैदा होती है तो हम अचानक इस मुद्दे को उठाते हैं। अदालत को कुछ समय के लिए इसकी निगरानी करनी चाहिए। पंजाब के वकील ने कहा कि राज्य ने छह दिसंबर को एक हलफनामा दायर किया था जिसमें फसल अवशेष जलाने के लिए जिम्मेदार लोगों से पर्यावरण जुर्माने की वसूली के बारे में भी विवरण है। वकील ने 21 नवंबर को पिछली सुनवाई के दौरान अदालत को बताया था कि दोषियों पर कुल दो करोड़ रुपये का पर्यावरण जुर्माना लगाया गया है।

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