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Gujarat Riots: पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट गिरफ्तार, कोर्ट ने 20 जुलाई तक की रिमांड पर भेजा

Wed, 13 Jul 2022 07:37 PM IST
Jeet Kumar एएनआई, अहमदाबाद
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संजीव भट्ट (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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गुजरात दंगा मामलों में अहमदाबाद अपराध शाखा सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और आरबी श्रीकुमार के बाद अब भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी आईपीएस संजीव भट्ट को भी गिरफ्तार कर लिया है। अहमदाबाद अपराध शाखा की टीम ने लंबे समय से बनासकांठा जेल में बंद संजीव भट्ट को मंगलवार के दिन गिरफ्तार किया है। भट्ट को धन के गबन और जाली दस्तावेजों के आरोप में गिरफ्तार किया है।

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इसके बाद क्राइम ब्रांच ने संजीव को कोर्ट के सामने पेश किया। ब्रांच ने कोर्ट से 14 दिनों की रिमांड मांगी। हालांकि, कोर्ट ने संजीव भट्ट को 20 जुलाई सुबह पांच बजे तक के लिए रिमांड पर भेज दिया। सरकारी वकील अमित पटेल ने यह जानकारी दी।

उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट
गौरतलब है कि तीस्ता सीतलवाड़ और श्रीकुमार को अहमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पिछले दिनों दर्ज कराई गई प्राथमिकी के आधार पर गिरफ्तार किया था। श्रीकुमार और सीतलवाड़ को गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते द्वारा मुंबई में उनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया था।  इसके साथ ही बनासकांठा जिले के पालनपुर की एक जेल में हिरासत में मौत के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट भी इस मामले में आरोपी हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिए जाने की एसआईटी रिपोर्ट को चुनौती देने वाली जाकिया जाफरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि तीस्ता सीतलवाड़ अपने स्वार्थ सिद्ध करने में जुटी रहीं। अदालत ने संजीव भट्ट और आरबी श्रीकुमार की ओर से झूठा हलफनामा दायर किए जाने का भी जिक्र किया था।

पीएम नरेंद्र मोदी को क्लीनचिट का फैसला बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गुजरात दंगों में विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य आरोपियों को दी गई क्लीनचिट को बरकरार रखा था। कोर्ट ने कहा था यह साबित करने के लिए कोई सुबूत नहीं है कि दंगे पूर्व नियोजित थे। प्रशासन के कुछ अधिकारियों की निष्क्रियता या विफलता को राज्य सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की पूर्व नियोजित साजिश का आधार नहीं माना जा सकता। न ही इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ राज्य प्रायोजित हिंसा कह सकते हैं।

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