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सियासत: सीताराम येचुरी ने कहा- यूपी चुनाव टालने के लिए भाजपा कोरोना का बना रही बहाना

Mon, 27 Dec 2021 01:01 AM IST
Jeet Kumar पीटीआई, गुवाहाटी

सार

सीताराम येचुरी ने सवाल किया कि जब काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन किया जा रहा था तब क्या कोविड-19 नहीं था? तथ्य यह है कि भाजपा को डर है कि वह यूपी में हार जाएगी और वह इसका सामना नहीं करना चाहती। 
 
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सीताराम येचुरी (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
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विस्तार
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भारत में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं साथ ही ओमिक्रॉन ने भी चिंता को बढ़ा दिया है। इस बीच कई राज्यों में चुनाव होने हैं इनमें उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव सबसे मुख्य माना जा रहा है। वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा चुनाव स्थगन की बात को लेकर माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा को हार का डर सता रहा है इसलिए यूपी चुनाव  स्थगित करने के लिए बढ़ते कोविड-19 मामलों के बहाना बना रही।

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कार्यक्रम में बोल रहे थे येचुरी 
सीताराम येचुरी असम के प्रख्यात कम्युनिस्ट नेता नंदेश्वर तालुकर के जन्म शताब्दी समारोह के अवसर पर एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग से 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव को स्थगित करने पर विचार करने का अनुरोध किया है क्योंकि देश में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट मामले बढ़ रहे हैं।

उन्होंने सवाल किया कि जब काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन किया जा रहा था तब क्या कोविड-19 नहीं था? तथ्य यह है कि भाजपा को डर है कि वह यूपी में हार जाएगी और वह इसका सामना नहीं करना चाहती। 
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अखिलेश यादव लोगों से समर्थन हासिल कर रहे 
सीताराम येचुरी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को घेरने के लिए ईडी का इस्तेमाल कर रही है। साथ ही आरोप लगाया कि बीजेपी राजनीतिक बदले की भावना से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव लोगों से समर्थन हासिल कर रहे हैं और इसलिए उनके स्थानीय नेताओं को ईडी की छापेमारी का सामना करना पड़ रहा है।

 न्यायपालिका के कामकाज पर भी उठाए सवाल
आगे कहा कि केंद्रीय एजेंसियां अपनी विश्वसनीयता खो रही हैं, उन्होंने न्यायपालिका के कामकाज पर भी सवाल उठाए। येचुरी ने कहा, अनुच्छेद 370 को खत्म करने के खिलाफ याचिका दायर किए एक दो महीने में तीन साल हो जाएंगे। लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है, साथ ही नागरिकता (संशोधन) अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी विचार नहीं किया गया है।

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