महामारी की तीन लहरों की तुलनात्मक अध्ययन में यह कहा गया है कि मौजूदा लहर के दौरान अब तक केवल 23.4 प्रतिशत रोगियों को ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता हुई है। जबकि दूसरी लहर के दौरान 74 प्रतिशत और पहली लहर के दौरान 63 प्रतिशत रोगियों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी थी।
देश में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर कमजोर पड़ती दिख रही है। शुक्रवार को लगातार सातवें दिन नए संक्रमितों की संख्या में कमी दर्ज की गई। शुक्रवार को 2 लाख 35 हजार 532 नए कोरोना संक्रमित मिले। एक दिन पहले दर्ज किए गए 2.85 लाख की तुलना में यह संख्या कम है। जबकि 21 जनवरी को रिकॉर्ड 3.74 लाख नए मामले मिले थे। तब से इस संख्या में कमी बनी हुई है। इसलिए स्वास्थ्य मंत्रालय मान रहा है कि अब लहर स्थिर हो रही है और अब नए संक्रमणों में उछाल आने की संभावना नहीं है।
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इस दौरान 3.35 लाख लोग ठीक भी हुए हैं। चिंताजनक बात यह है कि कोरोना से होने वाली मौतों में बढ़ोत्तरी हो रही है। शुक्रवार को कोरोना से 871 लोगों की मौत हुई। अकेले महाराष्ट्र में एक दिन में 103 मरीजों की जानें गईं, जो कि अक्तूबर 2021 के बाद सबसे ज्यादा है।
कोरोना से होने वाली मौत का ग्राफ इस तरह घट- बढ़ रहा
इससे एक दिन पहले गुरुवार 627 लोगों की मौत हुई थी। पिछले एक सप्ताह का आंकड़ा देखें तो बुधवार यानी 26 जनवरी को 573, 25 जनवरी को 665, 24 जनवरी को 614, 23 जनवरी को 439, 22 जनवरी को 525, 21 जनवरी को 488 और 20 जनवरी को 703 लोग कोरोना से मौत का शिकार हुए।
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सत्येंद्र जैन
- फोटो : एएनआई
मौतों की वजह क्या?
एक निजी अस्पताल के एक अध्ययन में कहा गया है कि कोरोना महामारी की मौजूदा लहर के दौरान मरने वाले 60 प्रतिशत रोगियों का या तो आंशिक या पूरी तरह से टीकाकरण नहीं हुआ था। मैक्स हेल्थकेयर की ओर से किए अध्ययन में कहा गया है कि जिन मौतों की रिपोर्ट की गई है, उनमें ज्यादातर 70 वर्ष से अधिक आयु के लोग हैं और वे कई तरह की पुरानी गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे, जैसे कि किडनी रोग, हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर आदि।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने क्या वजह बताई थी?
बीते कुछ दिनों पहले दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने भी इस बात पर जोर दिया था कि दिल्ली में वैक्सीन न लेने वालों की ही मौतें हो रही हैं। मृतकों में 75 फीसदी ऐसे लोग थे जिन्होंने वैक्सीन का एक भी डोज नहीं लगाया था। वहीं कुछ मामलों में ऐसे मरीजों की मौत हो रही है जिन्हें पहले से कोई गंभीर बीमारी थी।
कोरोना का टीका।
- फोटो : amar ujala
टीके से बच सकती है जान
यह कहा जा रहा है कि डेल्टा के मुकाबले कोरोना वायरस का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन कम खतरनाक है, लेकिन कोरोना उन लोगों को अपना शिकार बना रहा है जिन्होंने अभी तक पूर्ण टीकाकरण नहीं कराया है। कोरोना से मरने वालों के दो प्रमुख कारणों में टीकाकरण नहीं होना और गंभीर बीमारी का होना ही माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में क्या कहा गया?
जनवरी के दूसरे सप्ताह में यूएन की वर्ल्ड इकोनॉमिक सिचुएशन एंड प्रोसपेक्ट्स 2022 की रिपोर्ट में कहा गया कि ओमिक्रॉन वैरिएंट की वजह से संक्रमण की नई लहरें आ रही हैं और यदि वैक्सीनेशन की रफ्तार नहीं बढ़ाई गई तो मामलों में तेजी आएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में डेल्टा की जानलेवा लहर में अप्रैल से जून तक 2.4 लाख लोगों की मौतें हुई थीं। भारत में कोरोना की दूसरी लहर ने तबाही मचा दी थी। तेजी से संक्रमण और मौतें बढ़ी थीं। इससे देश का स्वास्थ्य सिस्टम भी चरमरा गया था। हालांकि दूसरी लहर के मुकाबले, तीसरी लहर में कम मौतें हुई हैं।
Prayagraj News : कोरोना का टीका लगवाने के लिए कतार में खड़े छात्र।
- फोटो : प्रयागराज
स्वास्थ्य मंत्रालय का क्या कहना है?
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक तीसरी लहर में भले ही लोग ज्यादा संख्या में संक्रमित हो रहे हैं लेकिन उन में देखे जाने वाले लक्षण ज्यादा खतरनाक नहीं है और संक्रमित लोग जल्दी ठीक हो रहे हैं। कोरोना की तीसरी लहर में होने वाली मौतों की कम संख्या को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इसके पीछे का एक कारण टीकाकरण भी है क्योंकि अब तक ज्यादा से ज्यादा लोग कोरोना का टीका लगवा चुके हैं। भारत में अब तक वैक्सीन की 154 करोड़ से ज्यादा डोज लग चुकी हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देशभर में 94 फीसदी व्यस्कों को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज और 72 फीसदी व्यस्कों को वैक्सीन के दोनों डोज लग गए हैं। इसके अलावा 15 से 18 आयु वर्ग के 52 फीसदी किशोरों-युवाओं को भी कोरोना की पहली खुराक दी जा चुकी है।
कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन नहीं मिलने से तड़पे थे मरीज (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
दूसरी और तीसरी लहर में अंतर क्या?
पिछले साल 30 अप्रैल 2021 के दौरान कोरोना के नए मामलों की संख्या 3,86,452 थी और उस दौरान कोरोना से 3059 मौतें हुई थी। उस समय केवल दो फीसदी लोगों को ही कोरोना का टीका लगा था। 28 जनवरी यानी शुक्रवार तक का आंकड़ा देखें तो देश में 871 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। वहीं 72 फीसदी लोगों को देश भर में कोरोना का टीका लग चुका है।
कोरोना से बचाव में कोरोना वैक्सीन बहुत कारगार साबित हो रहे हैं। भारत में मुख्य तौर पर कोविशिल्ड और कोवाक्सीन वैक्सीन लगाई जा रही है। अभी यह वैक्सीन सरकारी और निजी अस्पतालों में लगाई जा रही है लेकिन अब खुले बाजार में इसकी बिक्री को मंजूरी मिल गई है।