धोखाधड़ी के मामले में सात साल की सजा काट रहे पूर्व मंत्री और दूध सागर डेयरी के पूर्व अध्यक्ष विपुल चौधरी को गुजरात के मेहसाणा की एक अदालत ने शुक्रवार को बड़ी राहत देते हुए उनकी सजा को निलंबित कर दिया और उन्हें जमानत दे दी।
धोखाधड़ी के मामले में सात साल की सजा काट रहे पूर्व मंत्री और दूध सागर डेयरी के पूर्व अध्यक्ष विपुल चौधरी को गुजरात के मेहसाणा की एक अदालत ने शुक्रवार को बड़ी राहत देते हुए उनकी सजा को निलंबित कर दिया और उन्हें जमानत दे दी। विपुल चौधरी को 2014 में डेयरी को 22.5 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के मामले में सात साल की सजा सुनाई गई थी।
विज्ञापन
मेहसाणा के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वाईआर अग्रवाल ने चौधरी और 14 अन्य को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का दोषी ठहराया और सात साल कैद की सजा सुनाई थी। गुजरात के सहकारी क्षेत्र का प्रमुख चेहरा रहे चौधरी 1996 में शंकरसिंह वाघेला सरकार में मंत्री थे। वह 13 जुलाई को निचली अदालत के आदेश के बाद सलाखों के पीछे हैं।
अदालत ने 15 आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 406 (विश्वासघात), 465 (जालसाजी) और 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) के तहत भी दोषी ठहराया और उन्हें एक से चार साल तक की जेल की सजा सुनाई। चौधरी और अन्य के खिलाफ मेहसाणा 'बी' डिवीजन पुलिस थाने में 2014 में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जब वह दूध सागर डेयरी के साथ-साथ जीसीएमएमएफ के अध्यक्ष थे।
विज्ञापन
चौधरी और अन्य आरोपियों ने भी मजिस्ट्रेट के फैसले के खिलाफ सत्र अदालत में अपील दायर की, न्यायाधीश पवार ने उन्हें अपने पासपोर्ट जमा करने और अपनी अपील की सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने के लिए कहा। अदालत ने सभी आरोपियों को जमानत देते हुए उन्हें बिना अनुमति के देश नहीं छोड़ने का भी निर्देश दिया और उनसे अपना वर्तमान निवास नहीं बदलने को भी कहा।
प्राथमिकी के अनुसार, डेयरी अध्यक्ष के रूप में चौधरी ने 2014 में सूखा प्रभावित महाराष्ट्र में पशु चारा भेजने का निर्णय लिया था। हालांकि, राज्य सरकार ने आरोप लगाया था कि 22.5 करोड़ रुपये के पशु आहार को भेजने का निर्णय डेयरी की बोर्ड बैठक में कोई प्रस्ताव लाए बिना या कोई निविदा जारी किए बिना लिया गया था। जिन अन्य आरोपियों को सात साल कैद की सजा सुनाई गई है उनमें दूधसागर डेयरी के पूर्व बोर्ड सदस्य, इसकी पूर्व उपाध्यक्ष जलाबेन ठाकोर और पूर्व प्रबंध निदेशक निशीथ बक्शी भी शामिल हैं।