चकोतरा (Pummelo) की नई किस्म तैयार करने वाले वैज्ञानिक डॉक्टर अनिल कुमार दुबे ने अमर उजाला को बताया कि इसकी पुरानी किस्म साइज में बड़ी (1200 से 1300 ग्राम तक) होने के बाद भी अपेक्षाकृत कम रसीली होती है। लेकिन नई किस्म के कुल वजन का लगभग 41.13 फीसदी हिस्सा रस का ही होगा।
चकोतरा की नई किस्म की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि इसे ज्यादा समय तक पेड़ों पर ही सुरक्षित रखा जा सकेगा। इसे पकने की स्थिति में भी पेड़ों पर दो से तीन महीने तक छोड़ा जा सकेगा।
इसकी बुवाई जुलाई से सितंबर माह के बीच या फरवरी-मार्च माह में की जा सकती है। इसे आजकल के मौसम में भी उगाया जा सकता है।
नई किस्म के पेड़ का आकार छोटा होता है, इसलिए इसे सघन बागवानी में 4x4 या 4x5 मीटर की दूरी पर उगाया जा सकता है, जबकि पुरानी किस्म के बड़े पेड़ 7x7 मीटर जगह लेते हैं जो कम उपयोगी होता है।
हर पेड़ से लगभग 45-46 किलोग्राम तक फल प्राप्त किया जा सकता है। चकोतरा की नई किस्म को पूसा से प्राप्त किया जा सकता है। नई किस्म को संस्थान के 58वें दीक्षांत समारोह (1-3 मार्च) में लोगों के सामने पेश किया गया था।
चकोतरा भी लोगों में रोग प्रतिरोधी क्षमता पैदा करने में सहायक होता है। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट खूब प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें सूक्ष्म मात्रा में (0.39 फीसदी) साइट्रिक एसिड भी पाया जाता है, जो इसके स्वाद और उपयोगिता को बढ़ाता है और लोगों को बहुत पसंद आता है।