कोरोना मरीज। (प्रतीकात्मक फोटो)
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कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट ने दुनियाभर में डर की स्थिति पैदा कर दी है। अब तक 38 देशों में मिल चुके इस वैरिएंट को लेकर एक्सपर्ट्स साफ कर चुके हैं कि अभी इसके असर पर कुछ भी कहना मुश्किल है। इसके बावजूद ज्यादातर देशों ने यात्रा प्रतिबंध लगाने जारी रखे हैं। इस बीच भारत में ओमिक्रॉन से संक्रमित होने वाले पहले कुछ लोगों में शामिल एक डॉक्टर ने अपने हालचाल पर जानकारी दी है। उन्होंने लक्षणों के साथ अपने परिवार के बारे में भी बताया।
अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया से की गई बातचीत में ओमिक्रॉन से संक्रमित डॉक्टर ने वैरिएंट को लेकर फैले डर को दूर करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि जब उन्हें अपने ओमिक्रॉन से संक्रमित होने का पता चला, तो सबसे पहले खुद को शांत रखने की कोशिश की। उनके पत्नी और बच्चे भी क्वारैंटीन हो गए। डॉक्टर ने बताया कि वह बिल्कुल ठीक हैं। लेकिन एहतियात के तौर पर अभी बेंगलुरु के एक अस्पताल में आइसोलेशन में हैं।
संक्रमित होने के बाद अपने लक्षणों पर बात करते हुए डॉक्टर ने कहा, "मुझे शरीर दर्द, ठंड लगने और बुखार की शिकायत हुई है। लेकिन अब तक सांस लेने से जुड़ी कोई समस्या नहीं है।" उन्होंने कहा, "21 नवंबर की रात में हल्का बुखार आने के बाद मेरा अधिकतम बुखार 100 डिग्री फारहेनहाइट तक गया है। लेकिन जुकाम, कफ या बुखार जैसी परेशानियां नहीं झेलनी पड़ीं।"
तबियत नहीं सुधरी तो हुए अस्पताल में भर्ती
डॉक्टर ने बताया कि बुखार आने के बाद उन्हें आरटी-पीसीआर टेस्ट में कोरोना संक्रमित होने की बात पता चल चुकी थी। वे तीन दिन होम आइसोलेशन में भी रहे। लेकिन जब हालत नहीं सुधरी तो एक निजी अस्पताल में भर्ती हो गए। उन्होंने कहा कि उनके एचआरसीटी स्कैन के नतीजों में भी फेफड़ों पर ज्यादा प्रभाव नहीं दिख रहा है। यह बदलाव उतना ही है, जितना आम कोरोना मरीजों में 3-4 दिन के अंदर दिखता है।