कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन और वायु प्रदूषण का मेल संक्रमित लोगों के लिए भारी मुसीबत का कारण बन सकता है। ओमिक्रॉन के मामले में केवल माइल्ड कैटेगरी में संक्रमित मरीजों पर वायु प्रदूषण का असर उन्हें गंभीर स्तर पर बीमार कर सकता है और उन्हें लंबे समय तक के लिए अस्पतालों में भर्ती होने के लिए मजबूर कर सकता है। इस समय दिल्ली सहित देश के अनेक इलाकों में मौसम खराब बना हुआ है, जिसमें लोगों को सर्दी-खांसी जैसी सामान्य बीमारियां होती हैं। इसमें ओमिक्रॉन संक्रमण के ज्यादा तेजी के साथ फैलने की संभावना बढ़ जाती है। विशेषज्ञों की राय है कि इस दौरान मास्क पहनने, किसी समारोह में न जाने और शारीरिक दूरी बनाए रखने जैसे नियमों का पालन करते रहना चाहिए। संक्रमण से बचने का सबसे कारगर तरीका यही हो सकता है।
बीएलके अस्पताल के डॉ. एनके नायर ने अमर उजाला से कहा कि अब तक का ओमिक्रॉन का अनुभव बताता है कि यह गले पर ही आक्रमण करता है, डेल्टा वैरिएंट की तरह यह फेफड़े पर हमला नहीं करता है, यही कारण है कि इसमें मरीज ज्यादा गंभीर रूप से बीमार नहीं हो रहे हैं और उन्हें ऑक्सीजन देने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है।
डॉ. नायर ने कहा कि इस समय ओमिक्रॉन को लेकर बड़ा भ्रम बना हुआ है कि इससे लोगों को गंभीर संक्रमण नहीं हो रहा है, और इस कारण ज्यादा लोगों को अस्पताल जाने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन हमें समझना चाहिए कि ओमिक्रॉन बहुत भारी संख्या में लोगों को बीमार कर रहा है। इसका सर्वोच्च 15 से 30 दिन के बीच सामने आ सकता है। अमेरिका का अनुभव बताता है कि उस समय एक दिन में कई लाख संक्रमित मरीज भी सामने आ सकते हैं।