प्रोटोकॉल बनाया और पालन करवाया
वी जार्ज बताते हैं कि कोविड-19 का संक्रमित आने के पहले ही केरल ने प्रोटोकाल बनान शुरू कर दिया। जनवरी में ही हवाई अड्डे से आने वाले लोगों की गंभीरता के साथ स्क्रीनिंग और जिनमें भी कोविड-19 संक्रमित के लक्षण मिले, उन्हें सीधे अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया।
अस्पताल में कोविड-19 के संक्रमितों के लिए अलग वार्ड, क्वारंटीन की व्यवस्था, डा., नर्स, पैथोलॉजी विभाग, तकनीशियन समेत अन्य के लिए सुरक्षा के उपाय, उपकरण, किट, जांच किट, आईसीएमआर और एनआईवी अलाप्पुझा के सहयोग से जांच की रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी।
इसी के सामानांतर नर्स, डा., तकनीशियनों, आशा वर्करों को प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए। सरकार ने आईसीयू और वेंटिलेटर आदि के बारे में सोचना आर्डर करना शुरू कर दिया। बताते हैं इस पूरे अभियान में स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही।
यात्रा की हिस्ट्री न छिपाएं, खुद सामने आएं
वी जार्ज बताते हैं कि स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग तथा प्रशासन ने लोगों से अपील की कि वह अपने यात्रा की हिस्ट्री न छुपाएं, सामने आएं। केके शैलजा ने कहा कि यह छुपाना अपराध होगा।
इसके साथ केरल के स्वास्थ्य विभाग ने लोगों का पता लगाने, रैपिड टेस्टिंग, स्क्रीन टेस्टिंग समेत समेत सभी उपायों को अपनाया। संक्रमण की संभावना, संक्रमित या पाजिटिव के लिए अलग अलग स्तरों के प्रोटोकॉल बनाए।
लोगों की बड़े पैमाने पर जांच की। बताते हैं अब तक करीब 11 हजार जांच केरल के ही लोगों की हुई है। जहां लोग संक्रमित पाए गए, वहां उस क्षेत्र में उनके आस-पास संक्रमितों की भी जांच की गई। जिस क्षेत्र में संक्रमित ज्यादा मिले वहां रैपिड टेस्टिंग की गई।
बार-बार हाथ धोएं...लोगों ने पालन भी किया
एल. राधाकृष्णन तिरुअनंतपुरम में रहते हैं। राधाकृष्णन बताते हैं यहां हर जगह वॉशबेसिन या हाथ धोने की सुविधा नहीं थी, लेकिन राज्य सरकार ने कोविड-19संक्रमण की संभावना को देखते हुए लोगों को सावधान रहने के उपाय बताए।
काफी पहले से ही शहर में और स्थान-स्थान पर वॉश बेसिन लगे। लोगों से थोड़े-थोड़े अंतराल पर हाथ धोने के लिए कहा गया। कार्यालयों में इस तरह का प्रोटोकॉल अपनाया गया। ताकि वायरस की चेन तोड़ी जा सके। उसे होस्ट सेल न मिल सके।
इसी तरह से राज्य सरकार ने रक्त दान करने वालों की स्क्रीनिंग को बढ़ाया। उनकी कई स्तरों पर जांच का प्रोटोकॉल निधारित किया। सड़क के रास्ते या ट्रेन से आने वालों को भी जांच की प्रक्रिया से गुजारा।
तीन लेयर पर तैयार किए फाइटर
वी जार्ज बताते हैं कि केरल की सफलता का सबसे कारण तीन स्तर पर कोविड-19 से लडऩे वाले फाइटर तैयार करना रहा। बताते हैं यह राज्य सरकार के स्तर पर हुई प्लानिंग के कारण हो पाया।
इसमें सभी डा., नर्स, जांच कर्मी, तकनीशियन, आशावर्कर समेत लगाए गए करीब 60 हजार से लोगों को तीन हिस्सों में बांटा गया। रणनीति बनाई गई कि फ्रंट लेवेल पर पहली लेयर वाले लोग सबसे पहले जांच, चिकित्सा समेत अपना काम करेंगे।
उसके बाद दूसरी लेयर और फिर तीसरी लेयर वाले लोग अपनी जिम्मेदाी संभालेंगे। ताकि जांच, इलाज, क्वारंटीन, मानिटरिंग तथा अस्पताल में लोगों को स्वस्थ करने की प्रक्रिया निर्बाध चलती रहे।
लोगों को लगातार आराम भी मिलता रहे और किसी तरह का पैनिक क्रिएट न हो। जार्ज कहते हैं कि यही वजह है कि केरल में किसी तरह का न तो पैनिक क्रिएट हो पाया और न ही कोई बड़ी समस्या आई।
चाहें तो अमेरिका से तुलना कर लें
केरल के इस मॉडल पर एक बड़े निजी अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर अश्विन चौबे भी लगातार नजर रख रहे हैं। कोचीन में उनके मित्र चिकित्सक हैं। डा. अश्विन चौबे का कहना है कि कोविड-19 से फाइटिंग में वह रोल मॉडल केरल को ही मानते हैं।
डा. अश्विन का कहना है कि 24 जनवरी को केरल ने जो सतर्कता बरती, वह भारत में किसी और राज्य ने सोचा ही नहीं था। मुझे तो लग रहा है कि तब भारत सरकार भी इसे इतना बड़ा खतरा नहीं मान रही थी। केरल में 30 जनवरी को पहला संक्रमित आया।
अमेरिका के न्यूयार्क में करीब एक महीने बाद पहला मरीज मिला। लेकिन तुलना में देख लीजिए। डा. अश्विन कहते हैं कि दिल्ली, मुंबई, गुजरात समेत अन्य को देख लीजिए। यहां संक्रमितों की संख्या और संक्रमण की पुष्टि वाले लोग बढ़ रहे हैं।
लोगों की मृत्यु का भी आंकड़ा बढ़ रहा है, लेकिन केरल का रिकार्ड शानदार है। वजह बस एक है, केरल समय पर चेत गया था।