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क्या देश में हो गया है कोरोना का कम्युनिटी ट्रांसमिशन? बढ़ रही पॉजिटिव दर ने दिए इसके संकेत

Fri, 19 Jun 2020 09:22 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस - फोटो : PTI
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देशभर में कोविड-19 के लिए पॉजिटिव पाए जाने वाले नमूनों की औसत दर 17 मई को समाप्त में 4.6 प्रतिशत थी, जो 17 जून को सप्ताह में बढ़कर 7.8 प्रतिशत हो गई है। दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में इसका बढ़ना खतरे की घंटी है। विशेषज्ञों ने कहा है कि इससे यह बात स्पष्ट हो गई है कि देश में महामारी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। 

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सरकारी डाटा के अनुसार, दिल्ली में, 17 मई तक यह संख्या 7 फीसदी थी, जो 17 जून तक बढ़कर 31.6 फीसदी हो गई। दूसरे शब्दों में कहें तो, एक महीने पहले हर 100 नमूनों में से सात नमूने पॉजिटिव पाए जा रहे थे, जो अब बढ़कर 100 में से 31 हो गए हैं।


भारत, परीक्षण किए गए व्यक्तियों का नहीं बल्कि परीक्षण किए गए नमूनों का डाटा देता है। इसका मतलब यह है कि जो लोग कई बार परीक्षण करवाते हैं, उन्हें हर बार गिना जाता है, इसलिए पॉजिटिव दर डाटा के सुझाव से अधिक हो सकती है। 
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17 जून तक भारत में कोविड-19 के लिए 62 लाख से अधिक नमूनों की जांच की गई है। इसमें से 3,67,117 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप जनवरी में जांच शुरू होने से पहले की पॉजिटिव दर 5.9% थी। विशेषज्ञों ने कहा कि नए मामलों में वृद्धि के साथ मिलकर पॉजिटिव दर का बढ़ना, यह बताता है कि वायरस अब लोगों के बीच तेजी से फैल रहा है। 

'इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च इन वायरोलॉजी' के पूर्व प्रमुख टी जैकब जॉन ने कहा कि पॉजिटिव दर में वृद्धि लोगों के बीच में वायरस की व्यापकता में वृद्धि का प्रतिबिंब है।

एक बढ़ती पॉजिटिव दर लक्षित रणनीतियों से बहुत अधिक प्रभावित हो सकती है। उदाहरण के लिए भारत में, जहां केवल उन लोगों की जांच की जाती है, जिनमें वायरस के लक्षण दिखाई दे रहे हो। इस रणनीति का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि बहुत बड़ी संख्या में ऐसे लोग जांच से वंचित हो जाते हैं, जो एसिम्पटोमैटिक (जिनमें बीमारी के लक्षण नहीं दिखाई देते) हैं।

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जॉन ने कहा कि हमने अब तक देश की 0.5 फीसदी आबादी से भी कम की कोरोना जांच की है, यह संख्या बहुत कम है। हम यह नहीं मान सकते कि पूरी संक्रमित आबादी एक छोटे से अंश तक सीमित है। बढ़ती पॉजिटिव दर इंगित करती है कि शेष 99.5 फीसदी में संक्रमण दर बढ़ रही है और अप्रत्यक्ष रूप से इस तथ्य की ओर इशारा करती है कि कम्युनिटी ट्रांसमिशन (सामुदायिक संचरण) हो रहा है।

वायरस से देश के 10 सबसे प्रभावित राज्यों में, दिल्ली में पॉजिटिव रेट में सबसे बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। जहां 17 मई को संख्या सात फीसदी पर थी, जो 17 जून तक बढ़कर 31 फीसदी हो गई। इसके बाद हरियाणा जहां यह दर एक फीसदी से बढ़कर 10.1 फीसदी हो गई और फिर तमिलनाडु जहां यह दर 4.2 फीसदी से बढ़कर 10 फीसदी पर पहुंच गई है। 
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वायरस से सबसे अधिक प्रभावित राज्य महाराष्ट्र में 17 मई को पॉजिटिव दर 16.4 फीसदी थी, जो 17 जून को बढ़कर 21.2 फीसदी हो गई। कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा मामले और मौत महाराष्ट्र में ही रिपोर्ट की गई है। 

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कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित 10 राज्यों में शामिल गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश में हालांकि, पॉजिटिव दर में थोड़ी कमी देखी गई है। गुजरात में यह दर 11.3 फीसदी से कम होकर 10.1 हो गई। वहीं, राजस्थान में यह 2.2 फीसदी से कम होकर दो फीसदी और मध्यप्रदेश में यह 4.3 फीसदी से कम होकर 2.8 फीसदी हो गई है। 

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