45 मिनट प्रभावित रही थी व्हाट्सएप सेवा 22 मार्च को
अजय पांडे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनता कर्फ्यू की तरफ इशारा करते हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री के कहने पर लोगों ने 22 मार्च को लोगों ने जनता कर्फ्यू का पालन किया। करीब 4.45 बजे लोगों ने ताली, शंख, थाली बजाकर इसे सोशल मीडिया आदि पर शेयर करना शुरू कर दिया। ऑनलाइन पर वीडियो की बाढ़ सी आ गई।
अजय के अनुसार इसकी जानकारी पहले से थी। इसे टेलीकॉम के स्तर पर संभाल लिया गया, लेकिन व्हाट्सएप का सर्वर इसे नहीं झेल पाया। करीब 45 मिनट तक व्हाट्सएप की सेवा प्रभावित रही। अजय के मुताबिक मशीन और तकनीक, दोनों मानव जीवन को सहूलियत दे रही है, लेकिन इतने बड़ा ट्रैफिक आने पर मशीन और तकनीक दोनों के ठप हो जाने का भी खतरा रहता है। इस समय यदि ऐसी स्थिति आई तो बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। उनका कहना है, इसलिए मेरे विचार में 22 मार्च जैसा सामाजिक आयोजन फिलहाल नहीं होना चाहिए।
जोमैटो, ओला, ऊबर, स्विगी तो बंद है, लेकिन नेटफ्लिक्स, इंस्टाग्राम... चालू
लॉकडाउन के दौर में रेस्टोरेंट बंद हैं तो लोग खाना, नाश्ता भी नहीं मंगा रहे हैं। अजय बताते हैं कि लाखों लोग इन सब सुविधाओं का इस्तेमाल करते थे। इसका जरिया इंटरनेट था। एनसीआर में ही इन सेवाओं के आम दिनों के औसत इस्तेमाल को देखें तो कह सकते हैं कि प्रतिदिन जो बीसियों लाख मिनट का डेटा इनमें खपता था, इस समय वह नहीं हो रहा। लेकिन दूसरी तरफ सोशल मीडिया साइट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
ट्विटर, फेसबुक,व्हाट्सअप के अलावा लोग वीडियों सर्विस प्रोवाइडिंग साइट्स या एप का खूब इसस्तेमाल कर रहे हैं। इंस्टाग्राम का उपयोग बढ़ गया है। नेटफ्लिक्स और यू ट्यूब पर वीडियों देखने वाले लोगों की संख्या बढऩे के संकेत हैं। दिलचस्प यह भी है कि लोग आईआरसीटी, ट्रिवागो जैसी साइट्स को भी क्लिक कर रहे हैं। आीआरसीटी रेलवे से जुड़ी तो ट्रिवागो कम पैसे में होटल उपलब्ध कराने वाली साइट है। माना जा रहा है कि लोग लॉकडाउन के बाद की स्थिति को प्लान कर रहे हैं। इसके साथ-साथ मनोरंजन और न्यूज के लिए इंफोटेनमेंट साइट्स पर लोगों का रुझान बढ़ा है।