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कोरोना इफेक्ट: घर में कैद हुए यूजर्स... अटकने लगा इंटरनेट

Wed, 25 Mar 2020 09:02 PM IST
आसिम खान शशिधर पाठक, नई दिल्ली

सार

  • डेढ़ गुना तक बढ़ा डेटा का इस्तेमाल
  • संस्थागत डेटा इस्तेमाल में कमी
  • निजी डेटा इस्तेमाल बढऩे से शिफ्ट हो रहा है ट्रैफिक
  • घरों में कैद लोगों को अपना मनोरंजन चाहिए, सूचना भी चाहिए और जरूरतें भी पूरी करनी हैं
  • जोमैटो, ओला, ऊबर, स्विगी तो बंद है, लेकिन नेटफ्लिक्स, इंस्टाग्राम... भूचाल मचा रहे
  • 22 मार्च को 5 बजे डेटा उपयोग बेहिसाब बढ़ा था, थम सा गया था वाट्सऐप
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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कोरोना से उपजे सोशल डिस्टेसिंग के दौर में इनसान कुछ ज्यादा ही इंटरनेट फ्रेंडली हो चला है। इंटरनेट के उपयोगकर्ता तो नहीं बढ़े हैं लेकिन निजी स्तर पर इंटरनेट की आवश्यकता और उपयोग बढ़ गया है। लोग वर्क फ्रॉम होम (घर से काम) पर हैं। बढ़े ट्रैफिक के कारण लोगों को धीमे इंटरनेट की परेशानी से भी जूझना पड़ रहा है। 

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बहुराष्ट्रीय कंपनी एरिक्सन 165 देशों में इंटरनेट, टेलीकॉम ट्रैफिक के क्षेत्र में सेवाएं देती है। इसकी ग्लोबल इमर्जेंसी टेक्निकल टीम के वरिष्ठ सदस्य अजय पांड के अनुसार मौजूदा दौर चुनौती भरा है। माइक्रोसॉफ्ट के निदेशक, स्थानीयकरण, बालेंदु दधीच का कहना है कि निजी तौर पर लोगों ने अपना डेटा का इस्तेमाल डेढ़ गुणा तक बढ़ा दिया है।

इस समय सरकार से लेकर आम लोगों और कंपनियों के बीच में संपर्क का जरिया इंटरनेट, टेलीकॉम ही है। सरकार भी टेलीकॉम, इंटनरेट का ही प्रयोग कर रही है। बालेंदु कहते हैं, इस समय वीडियो कॉल की संख्या काफी बढ़ गई है। लोग ऑनलाइन क्लास, योग, ट्रेनिंग और कामकाज के लिए भी लोग इंटरनेट का इस्तेमाल अधिक कर रहे हैं। इसके कारण इंटरनेट धीमा हो रहा है। इंटरनेट धीमा होने का कारण यह भी है कि संस्थागत डेटा यूज की बजाय निजी स्तर पर इसका इस्तेमाल बढ़ा है। अचानक डेटा यूज बढऩे से बैंडविद्थ या सिस्टम के प्रभावित होने, सेवा के बैठने तक का खतरा रहता है।
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फेसबुक : मांग का दबाव बढ़ गया
बालेंदु दधीच का कहना है कि मौजूदा हालात में निजी तौर पर औसतन डेटा इस्तेमाल 10 जीबी से 15 जीबी के करीब पहुंच सकता है। ट्रैफिक शिप्ट हो रहा है। फेसबुक ने भी कहा है कि उसके सर्वर पर मांग का दबाव काफी बढ़ रहा है। दधीच का कहना है कि अब लोग घरों में कैद लोगों को अपना मनोरंजन भी चाहिए, सूचना भी चाहिए और जरूरतें भी पूरी करनी हैं। ऐसे समय में जब अखबार भी बंटने बंद हो रहे हैं तो लोगों का रूझान इंटरनेट की तरफ ही बढ़ेगा। जाहिरन लोग टेलीफोन या इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों से पैकेज में मिलने वाले पूरे डेटा का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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45 मिनट प्रभावित रही थी व्हाट्सएप सेवा 22 मार्च को
अजय पांडे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनता कर्फ्यू की तरफ इशारा करते हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री के कहने पर लोगों ने 22 मार्च को लोगों ने जनता कर्फ्यू का पालन किया। करीब 4.45 बजे लोगों ने ताली, शंख, थाली बजाकर इसे सोशल मीडिया आदि पर शेयर करना शुरू कर दिया। ऑनलाइन पर वीडियो की बाढ़ सी आ गई। 

अजय के अनुसार इसकी जानकारी पहले से थी। इसे टेलीकॉम के स्तर पर संभाल लिया गया, लेकिन व्हाट्सएप का सर्वर इसे नहीं झेल पाया। करीब 45 मिनट तक व्हाट्सएप की सेवा प्रभावित रही। अजय के मुताबिक मशीन और तकनीक, दोनों मानव जीवन को सहूलियत दे रही है, लेकिन इतने बड़ा ट्रैफिक आने पर मशीन और तकनीक दोनों के ठप हो जाने का भी खतरा रहता है। इस समय यदि ऐसी स्थिति आई तो बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। उनका कहना है, इसलिए मेरे विचार में 22 मार्च जैसा सामाजिक आयोजन फिलहाल नहीं होना चाहिए।  

जोमैटो, ओला, ऊबर, स्विगी तो बंद है, लेकिन नेटफ्लिक्स, इंस्टाग्राम... चालू
लॉकडाउन के दौर में रेस्टोरेंट बंद हैं तो लोग खाना, नाश्ता भी नहीं मंगा रहे हैं। अजय बताते हैं कि लाखों लोग इन सब सुविधाओं का इस्तेमाल करते थे। इसका जरिया इंटरनेट था। एनसीआर में ही इन सेवाओं के आम दिनों के औसत इस्तेमाल को देखें तो कह सकते हैं कि प्रतिदिन जो बीसियों लाख मिनट का डेटा इनमें खपता था, इस समय वह नहीं हो रहा। लेकिन दूसरी तरफ सोशल मीडिया साइट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। 

ट्विटर, फेसबुक,व्हाट्सअप के अलावा लोग वीडियों सर्विस प्रोवाइडिंग साइट्स या एप का खूब इसस्तेमाल कर रहे हैं। इंस्टाग्राम का उपयोग बढ़ गया है। नेटफ्लिक्स और यू ट्यूब पर वीडियों देखने वाले लोगों की संख्या बढऩे के संकेत हैं। दिलचस्प यह भी है कि लोग आईआरसीटी, ट्रिवागो जैसी साइट्स को भी क्लिक कर रहे हैं। आीआरसीटी रेलवे से जुड़ी तो ट्रिवागो कम पैसे में होटल उपलब्ध कराने वाली साइट है। माना जा रहा है कि लोग लॉकडाउन के बाद की स्थिति को प्लान कर रहे हैं। इसके साथ-साथ मनोरंजन और न्यूज के लिए इंफोटेनमेंट साइट्स पर लोगों का रुझान बढ़ा है।
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