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संकट: फिर से स्कूलों को बंद करने की चल रही तैयारी! एनसीआर में बढ़ रहे कोरोना मामलों के चलते होगा ऐसा

आशीष तिवारी, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 14 Apr 2022 11:08 PM IST

सार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर के आला अधिकारियों ने सभी राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह रोजाना स्कूलों में मॉनिटरिंग करें और वहां आ रहे पॉजिटिव छात्रों के मामलों को स्वास्थ्य मंत्रालय से अपडेट कराएं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे
दिल्ली एनसीआर में बढ़ रहे कोरोना के मामलों के चलते एक बार फिर से स्कूलों को बंद करने की तैयारी चल रही है। नोएडा, गाजियाबाद, दिल्ली और गुरुग्राम के अलग-अलग स्कूलों में अब तक तकरीबन 30 से ज्यादा छात्रों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय अलर्ट हो गया है।


स्कूल खुलने के बाद छात्रों में तेजी से पॉजिटिव होने की मामलों की संख्या के बाद में स्वास्थ्य मंत्रालय ने आपातकालीन बैठक की। सूत्रों का कहना है कि फिलहाल संबंधित राज्यों को स्कूलों में बढ़ रहे मामलों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्देश यह भी दिए गए हैं अगर मामले लगातार बढ़े तो फिर से ऑनलाइन क्लास शुरू करने के लिए व्यवस्था की जाए।


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक बुधवार को देर शाम देश के अलग-अलग राज्यों से आई रिपोर्ट पर बैठक की गई थी। सूत्रों का कहना है बैठक में सबसे ज्यादा चिंता स्कूलों में बढ़ रहे छात्रों के बीच कोरोना की हुई। इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर के आला अधिकारियों ने सभी राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह रोजाना स्कूलों में मॉनिटरिंग करें और वहां आ रहे पॉजिटिव छात्रों के मामलों को स्वास्थ्य मंत्रालय से अपडेट कराएं।


ऑनलाइन क्लासेज की व्यवस्था के लिए तैयार रहें स्कूल

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगर इसी तरीके से स्कूलों में मामले बढ़ते रहेंगे तो निश्चित तौर पर स्कूलों को ऑनलाइन क्लासेस के लिए तैयार रहना होगा। क्योंकि स्कूलों में बच्चों के आने से अगर पॉजिटिव मामले बढ़ेंगे तो हालात निश्चित तौर पर चिंताजनक ही होंगे। इसलिए ऐसी कोई स्थिति पैदा न हो इसके पहले से ही व्यापक बंदोबस्त किए जा रहे हैं।


मंत्रालय की इस बैठक में हरियाणा और उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य अधिकारियों ने अपने राज्यों में आ रहे कोरोना के मामले खासतौर से स्कूलों में बच्चों में हुए कोरोना की पूरी रिपोर्ट सौंपी है। सूत्रों का कहना है फिलहाल उत्तर प्रदेश और हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए हैं कि अगर एक तय संख्या से ज्यादा स्कूलों में पॉजिटिव केस आते हैं तो उन स्कूलों को फिलहाल बंद कर दिया जाए।


कोई खतरनाक वैरिएंट अब तक तो सामने नहीं आया है

आईसीएमआर से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों में जो भी पॉजिटिव मामले आए हैं उनकी जीनोम सीक्वेंसिंग कराई जा चुकी है। फिलहाल किसी भी मामले में कोई नया खतरनाक वैरिएंट सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्कूलों में ऐसे ही मामले बढ़ते रहे तो स्थिति विस्फोटक हो सकती है। इसलिए स्कूलों की लगातार मॉनिटरिंग हो और अगर मामले इसी संख्या में बढ़ते रहे तो स्कूलों को एक बार फिर से बंद कर ऑनलाइन क्लासेज चलाने का विकल्प खुला रखा जाएगा।
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हालांकि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इस बात का बिल्कुल अंदाजा था जब स्कूल खुलेंगे तो मामले सामने आएंगे। फिलहाल जितने भी मामले आ रहे हैं वह सभी ओमिक्रोन वैरिएंट के ही हैं। इसलिए फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है। उत्तर प्रदेश और हरियाणा के स्कूलों की ओर से राज्य सरकारों को दी गई जानकारी में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि स्कूलों में बच्चों के बैठने की व्यवस्था सोशल डिस्टेंसिंग के साथ-सथ रोजाना सैनिटाइजेशन के तहत की जा रही है। जिन स्कूलों में कोरोना के मामले आ रहे हैं उनको  कोविड प्रोटोकॉल के तहत तय समय के लिए बंद किया जा रहा है।  


कई राज्यों में अभिभावकों के स्कूल में प्रवेश पर लगी रोक

छात्रों में कोरोना पॉजिटिव के बढ़ रहे मामलों के बीच उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली समेत कई अन्य राज्यों में अभिभावकों को स्कूलों के अंदर आने से पूरी तरीके से प्रतिबंधित कर दिया गया है। ऑल इंडिया पब्लिक स्कूल फेडरेशन से जुड़े एनसीआर के एक प्राइवेट स्कूल के संचालक विवेक मल्होत्रा कहते हैं कि स्कूलों में अभिभावकों के प्रवेश को प्रतिबंधित करके और स्कूलों में छात्रों के कक्षा वार समय को बदल करके हम कुछ हद तक स्कूलों में कोरोना के बढ़ने वाले खतरे को रोक सकते हैं।


विवेक का कहना है कि स्कूलों के छात्रों की जांच भी हो रही है और अगर कोई मामले आते हैं तो उसकी तत्काल विभाग को जानकारी भी दी जा रही है। उनका कहना है कि स्कूलों को बंद करके कोई फायदा नहीं होने वाला। बेहतर है कि हम जिस तरीके से सोसायटी के अलग-अलग हिस्सों में कड़ी मॉनिटरिंग के साथ व्यवस्थाओं को खोल रहे हैं उसी तरीके से स्कूलों को भी चलने देना चाहिए।
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