कोरोना महामारी में बच्चों को भी संक्रमण का खतरा हो सकता है। वर्तमान में ज्यादातर संक्रमित बच्चे बिना लक्षण वाले हैं लेकिन आगामी दिनों में अगर वायरस का रूप बदलता है तो बच्चों को परेशानी बढ़ सकती है। दो से तीन फीसदी बच्चों को अस्पतालों में भर्ती भी करना पड़ सकता है। इसीलिए राज्यों को जल्द ही बच्चों की चिकित्सीय व्यवस्था को बढ़ाने के दिशा निर्देश दिए जाएंगे।
अभी तक सरकार कोरोना महामारी में वयस्कों की भांति बच्चों में भी संक्रमण का खतरा होने के अलावा गंभीर मामलों से इनकार रही थी लेकिन अब नए अध्ययन और महामारी के साथ-साथ वायरस के नए स्वरूपों के व्यवहारों का अध्ययन करने के बाद पहली बार सरकार ने दिशा-निर्देशों पर काम करना शुरू कर दिया है।
अस्पतालों में बच्चों के लिए अलग से व्यवस्थाएं बढ़ाने पर रहेगा जोर
नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि बच्चों के लिए अलग से चिकित्सीय दिशा निर्देश तैयार हो रहे हैं। अगले एक से दो दिन में यह दिशा-निर्देश राज्यों को भेजे जाएंगे। अस्पतालों में बच्चों के लिए अलग से व्यवस्थाएं बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। डॉ. वीके पॉल ने यह भी कहा कि अभी बच्चों में संक्रमण का खतरा है लेकिन संक्रमित होने के बाद गंभीर मामले बहुत कम हैं। ज्यादातर बच्चे संक्रमित होने के बाद घर पर ही ठीक हो रहे हैं।
बच्चों में संक्रमण को लेकर राष्ट्रीय टास्क फोर्स ने अंतरराष्ट्रीय अध्ययन, महामारी के असर, नए वैरिएंट इत्यादि को लेकर जब विमर्श किया गया तो यह तय हुआ कि इन्हें बचाने के लिए अभी से जिला स्तर पर काम करना होगा। एक एहतियात के तौर पर अस्पतालों में बालरोग सेवाओं को बढ़ाया जाएगा। हालांकि लोगों से यही अपील है कि जैसे बड़े, वैसे ही बच्चों को संक्रमण से बचाया जा सकता है। इन बच्चों को संक्त्रस्मण से बचाने के लिए जरूरी है कि माता-पिता पूरी तरह से जागरूक रहें। उन्होंने बताया कि अस्पतालों में बिस्तरों की व्यवस्था, आईसीयू, वेंटिलेटर सहित अन्य चिकित्सीय सेवाओं को बढ़ाने जोर दिया जाएगा। इसके अलावा बच्चों के टीकाकरण को लेकर भी अध्ययन चल रहे हैं जिनके परिणाम सामने आने के बाद बच्चों को भी वैक्सीन दिया जा सकता है।
कोरोना के बाद बच्चों में एमआईएस-सी
डॉ. वीके पॉल ने बताया कि बच्चों में मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेट्री सिंड्रोम (एमआईएस-सी) की बीमारी देखने को मिल रही है। यह बीमारी कोरोना संक्रमण के बाद होती है। यह पूरी तरह से पोस्ट कोविड असर है। उस वक्त बच्चे की जांच करेंगे तो आरटी-पीसीआर निगेटिव होगी लेकिन एंटीबॉडी जांच में उसके संक्त्रस्मित होकर ठीक होने का पता चलेगा। ऐसे बच्चों में दो से छह सप्ताह बाद कई तरह के लक्षण मिल रहे हैं। इसका उपचार उपलब्ध है लेकिन समय पर पता चलना बहुत जरूरी है। इसलिए लोगों को और भी सतर्क रहने की आवश्यकता है।
अभी दो ही खुराक लगेंगी वैक्सीन की
नई दिल्ली। आने वाले दिनों में टीके की एक ही खुराक से काम चल जाएगा वाली खबरों पर केंद्र ने साफ किया कि अभी कोई फैसला नहीं हुआ है इस पर अध्य्यन चल रहा है। नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने स्पष्ट किया है कि अभी कोविशील्ड और कोवाक्सिन की दोनों खुराक लेना जरूरी है। यह आगे भी टीकाकरण कार्यक्रम में जारी रहेगा। अभी एकल खुराक को लेकर फैसला नहीं लिया गया है। इससे पहले टीकाकरण को लेकर गठित राष्ट्रीय तकनीकी सलाह समूह के अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा था कि कोविशील्ड की एकल खुराक को लेकर काम चल रहा है जिस पर अध्ययन के परिणाम पर फैसला लिया जाएगा। इसके अलावा डॉ. वीके पॉल ने कहा कि मिश्रित खुराक को लेकर अभी फैसला नहीं लिया है। अभी अध्ययन चल रहे हैं जिनका परिणाम आना बाकी है।