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कोरोना के खिलाफ जंग में ब्रह्मास्त्र बने 8 टीके: किस वैक्सीन में है कितना दम, आइए जानते हैं

Thu, 10 Jun 2021 07:43 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पूरी दुनिया को झकझोरने वाली कोरोना महामारी से निपटने के लिए विश्व में अब तक आठ टीके बन चुके हैं। इनमें से भारत ने अब तक तीन को मंजूरी दी है। इन सभी टीकों का प्रभावशीलता अलग-अलग है। 
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
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विस्तार
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कोरोना महामारी से बचाव के लिए टीकाकरण ही सबसे कारगर तरीका माना गया है। डेढ़ साल में कोविड-19 ने पूरी दुनिया में 17.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को चपेट में लिया और 37 लाख से ज्यादा को मौत की नींद सुला दिया। अब तेजी से टीकाकरण हो रहा है, ताकि इससे बचा जा सके। 

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महामारी से जंग में जुटे विश्व के अधिकांश देशों ने अपने-अपने देशों में कोरोना रोधी टीकाकरण शुरू कर दिया है। विकसित देशों समेत भारत में तो रोज लाखों लोगों को वैक्सीन लगाए जा रहे हैं। पूरी दुनिया में कोविड-19 रोधी आठ टीकों का विकास हो चुका है, वहीं भारत में अब तक तीन-कोविशील्ड, कोवाक्सिन व स्पूतनिक-वी को मंजूरी दी गई है।

दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर से पूरी दुनिया में फैले कोरोना विषाणु ने समूची मानवता पर संकट खड़ा कर दिया। क्या विकसित व क्या विकासशील सभी देश इसकी जद में आ गए। करोड़ों लोग इसके संक्रमण के शिकार हुए तो लाखों को जान से हाथ धोना पड़ा, लेकिन धन्य हैं वे वैज्ञानिक जिन्होंने इससे निपटने के उपाय खोजे और बहुत कम समय में टीके तैयार कर बचाव का तरीका खोजा। 
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भारत में 24 करोड़ खुराक दी गई
देश में मार्च से टीकाकरण शुरू हुआ था और अब तक करीब 24 करोड़ खुराक लोगों को दी जा चुकी है। भारत में अभी कोविशील्ड, कोवाक्सिन और स्पूतनिक-वी लगाए जा रहे हैं। इनमें से पहले दो यानी कोविशील्ड व पूर्णत: स्वदेशी कोवाक्सिन ही सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जा रहे हैं। स्पूतनिक का उपयोग उत्पादन कम होने से सीमित मात्रा में ही हो रहा है। 

ये हैं कोरोना के खिलाफ आठ ब्रह्मास्त्र

  • कोविशील्ड: यह दो डोज वाला टीका है। इसे आक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका ने बनाया है और पुणे का सीरम इंस्टीट्यूट इसका उत्पादन कर रहा है। यह कोरोना के खिलाफ 70 फीसदी कारगर है। यह कोरोना के यूके वैरिएंट (B117), साउथ अफ्रीकी वैरिएंट (B1351) के खिलाफ असरदार है। ब्राजील के वैरिएंट (P1) के खिलाफ ज्यादा प्रभावी नहीं है।
  • कोवाक्सिन: यह भारत की पूरी तरह स्वदेशी वैक्सीन है। भारत बायोटेक ने इसे बनाया है। इसके भी दो डोज दिए जाते हैं। यह 78 फीसदी असरदार है। यह यूके वैरिएंट समेत कुछ अन्य वैरिएंट के खिलाफ भी कागगर है।
  • स्पूतनिक-वी: रूस में निर्मित यह दो डोज वाली वेक्टर वैक्सीन है। 91 फीसदी कारगर है। 
  • फाइजर-बायोएनटेक: यह भी दो खुराक वाली वैक्सीन है। यह 95 फीसदी कारगर है। इसके साथ ही यह कोरोना के यूके वैरिएंट (B117), साउथ अफ्रीकी वैरिएंट (B1351) और ब्राजील वैरिएंट (P1) के खिलाफ भी काफी असरदार है।
  • जॉनसन एंड जॉनसन: यह दुनिया की एकमात्र एकल खुराक वाली वैक्सीन है। यह 66 फीसदी कारगर है। यह यूके वैरिएंट (B117), साउथ अफ्रीकी वैरिएंट (B1351) और ब्राजील वैरिएंट (P1) तीनों के खिलाफ कारगर है। लेकिन B1351 और P1 के खिलाफ ज्यादा असरदार नहीं है। 
  • मॉडर्ना: फाइजर की तरह यह भी दो खुराक वाली वैक्सीन है। यह कोरोना खिलाफ 95 फीसदी कारगर है। यह भी कोरोना के यूके वैरिएंट (B117), साउथ अफ्रीकी वैरिएंट (B1351) और ब्राजील वैरिएंट (P1) के खिलाफ भी काफी असरदार है।
  • साइनोवैक बायोटेक : यह चीन की वैक्सीन है, यह भी दो डोज़ वाली वैक्सीन है जो कोरोना के खिलाफ 50 फीसदी असरदार  है।
  • नोवावैक्स: यह दो खुराक वाली वैक्सीन है। यह 89 फीसदी कारगर है। अलग अलग वैरिएंट की बात करें तो यह यूके और ब्राजील वैरिएंट के खिलाफ असरदार है।
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