न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Thu, 27 Jan 2022 03:15 PM IST
भारत में टीकाकरण को मिली रफ्तार की वजह से देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले कोविशील्ड और कोवाक्सीन को खुले बाजार में बिक्री के लिए मंजूरी दे दी गई। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने कोविशील्ड और कोवाक्सिन के लिए कंपनियों को सशर्त बाजार में उतारने की मंजूरी दे दी है। लेकिन मेडिकल स्टोर पर वैक्सीन नहीं मिलेगी। अस्पताल और क्लीनिक से ही टीके खरीद सकते हैं।
एक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में खुले बाजार के लिए दोनों टीकों की कीमतों के बारे में चर्चा हुई थी। कोरोना टीकाकरण के दौरान भारत में सबसे ज्यादा सीरम की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवाक्सीन इन दोनों वैक्सीन का ही इस्तेमाल किया जा रहा है।
कितनी होगी कीमत?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार अभी दोनों टीकों को थोक में 205 रुपये के आसपास खरीद रही है। माना जा रहा है कि इस पर 33 फीसदी का मुनाफा जोड़ा जाएगा जिससे कोविशील्ड और कोवाक्सीन 275 रुपये प्रति खुराक के आसपास हो सकती हैं। इसके अलावा सरकार प्रति खुराक 150 रुपये का सेवा शुल्क लिए जाने को भी मंजूरी दी जा सकती है। इस हिसाब से टीके की कीमत 425 रुपये होगी। बताया जा रहा है कि सरकार जो कीमतें तय करेगी उसके बाद कोई भी कंपनी या विक्रेता इससे ज्यादा कीमत नहीं वसूल कर पाएगी।
कोवाक्सीन
- फोटो : पीटीआई
भारत में टीकाकरण को मिली रफ्तार की वजह से देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले कोविशील्ड और कोवाक्सीन को खुले बाजार में बिक्री के लिए मंजूरी दे दी गई। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने कोविशील्ड और कोवाक्सिन के लिए कंपनियों को सशर्त बाजार में उतारने की मंजूरी दे दी है। लेकिन मेडिकल स्टोर पर वैक्सीन नहीं मिलेगी। अस्पताल और क्लीनिक से ही टीके खरीद सकते हैं।
एक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में खुले बाजार के लिए दोनों टीकों की कीमतों के बारे में चर्चा हुई थी। कोरोना टीकाकरण के दौरान भारत में सबसे ज्यादा सीरम की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवाक्सीन इन दोनों वैक्सीन का ही इस्तेमाल किया जा रहा है।
कितनी होगी कीमत?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार अभी दोनों टीकों को थोक में 205 रुपये के आसपास खरीद रही है। माना जा रहा है कि इस पर 33 फीसदी का मुनाफा जोड़ा जाएगा जिससे कोविशील्ड और कोवाक्सीन 275 रुपये प्रति खुराक के आसपास हो सकती हैं। इसके अलावा सरकार प्रति खुराक 150 रुपये का सेवा शुल्क लिए जाने को भी मंजूरी दी जा सकती है। इस हिसाब से टीके की कीमत 425 रुपये होगी। बताया जा रहा है कि सरकार जो कीमतें तय करेगी उसके बाद कोई भी कंपनी या विक्रेता इससे ज्यादा कीमत नहीं वसूल कर पाएगी।
‘कोविशिल्ड’ और भारत बायोटेक की ‘कोवैक्सीन’
- फोटो : twitter
अभी कितने में मिल रही?
अभी कोविशील्ड और कोवाक्सीन को देश में आपात इस्तेमाल की ही मंजूरी मिली है। अभी इसका इस्तेमाल सरकारी और निजी अस्पतालों में हो रहा है। सरकारी अस्पतालों में लोगों को मुफ्त टीके लगाए जा रहे हैं जबकि निजी अस्पतालों में कोविशील्ड की कीमत 780 रुपये और कोवाक्सीन की कीमत 1200 रुपये प्रति खुराक है। इन कीमतों में 150 रुपये प्रति खुराक सेवा शुल्क भी शामिल है।
देश ने कोरोना के खिलाफ टीकाकरण में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है। देश में अब तक 150 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी है। देश ने पिछले साल 21 अक्टूबर को 100 करोड़ वैक्सीनेशन का आंकड़ा हासिल किया था। 15 से 18 साल के बच्चों को भी टीका लगाया जा रहा है।
फाइजर और मॉडर्ना
- फोटो : पीटीआई
दुनिया में उपयोग होने वाले अन्य कोरोना वैक्सीन की कीमत क्या है?
कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले दुनिया भर में खूब मिल रहे हैं। कोरोना का नया वैरिएंट कुछ ऐसे लोगों को भी संक्रमित कर रहा है जिन्हें टीका लगाया गया है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि टीके गंभीर बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने और मौत के खिलाफ कारगर साबित हुए हैं। अभी अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में तीन तरह के फाइजर-बायोएनटेक, मार्डना और जॉनसन एंड जॉनसन के टीके समेत अन्य टीके लगाए जा रहे हैं।
अक्तूबर 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक मॉर्डना प्रति खुराक 32-37 डॉलर के बीच है यानी भारतीय रुपये के हिसाब से इसकी कीमत 2,408- 2,785 रुपये के बीच है।
यूरोपीय संघ फाइजर के लिए प्रति खुराक 23.15 डॉलर यानी भारतीय रुपये के हिसाब से करीब 1,732 है।
वहीं मॉडर्ना के एक खुराक के लिए $ 25.50 यानी करीब 1,920 भारतीय रुपये का भुगतान कर रहा है।
Johnson and Johnson, जॉनसन एंड जॉनसन
- फोटो : सोशल मीडिया
वहीं जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन की कीमत 10 डॉलर प्रति खुराक है। यानी भारतीय मुद्रा के हिसाब से इसकी कीमत करीब 752 रुपये है।
एस्ट्राजेनेका का वैक्सजेवरिया प्रमुख टीकों में सबसे सस्ता है। ब्राजील में प्रति खुराक इसकी कीमत 3.16 डॉलर है जबकि दुनिया के बाकी देशों में इस टीके के लिए 3.50 से लेकर सात डॉलर तक चार्ज किया जाता है।
फाइजर सीईओ अल्बर्ट बाउरला के एक बयान के मुताबिक उच्च आय वाले देशों की कीमत एक टेकअवे भोजन की लागत की तरह है, लेकिन मध्यम आय वाले देशों के लिए, हम इस कीमत का आधा चार्ज कर रहे हैं और कम आय वाले देशों में हम मूल रूप से गैर-लाभकारी कीमत ले रहे हैं।
युगांडा का कंपाला शहर
- फोटो : Pixabay
कौन से देश टीकों के लिए अधिक भुगतान कर रहे हैं?
कम आय वाले देशों में वैक्सीन असमानता के बारे में बहस अब भी जारी है। अफ्रीकी राष्ट्रों ने महामारी के दौरान पर्याप्त वैक्सीन आपूर्ति हासिल करने के लिए काफी संघर्ष किया है, और कुछ देशों ने अपने समक्ष के धनी देशों की तुलना में खुराक के लिए काफी अधिक शुल्क दिया है। कई देश कोरोना की वैक्सीन के लिए अलग-अलग कीमत चुका रहे हैं।
दक्षिण अफ्रीका कथित तौर पर एस्ट्राजेनेका टीके की प्रति खुराक के लिए 5.25 डॉलर का भुगतान कर रहा है। जबकि यूरोपीय देशों में लोगों को इसके लिए सिर्फ 3.50 डॉलर का शुल्क लिया जा रहा है। युगांडा में एस्ट्राजेनेका के वैक्सीन की प्रत्येक खुराक के लिए सात डॉलर तक लिया जा रहा है।
कोलंबिया मॉडर्ना के टीके की प्रति खुराक के लिए लगभग 30 डॉलर का भुगतान कर रहा है। भारतीय मुद्रा के हिसाब से इसकी कीमत 2,255 रुपये है। कोलंबिया में इस टीके के लिए अमेरिका से दोगुनी राशि वसूल की गई है।
बांग्लादेश कथित तौर पर एस्ट्राजेनेका के टीके की प्रत्येक खुराक के लिए चार डॉलर का भुगतान कर रहा है। इस टीके का निर्माण सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने किया है।