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COP26: जानिए तमिलनाडु की विनीशा उमाशंकर के बारे में जिसने दुनिया के नेताओं को सुना दी खरी-खरी, प्रिंस विलियम के साथ किया मंच साझा

Sat, 06 Nov 2021 06:42 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

विनीशा को दूसरी ग्रेटा थनबर्ग कहा जा रहा है। वे अर्थशॉट पुरस्कार के फाइनलिस्ट में से एक थीं। वे सौर ऊर्जा से चलने वाली आइरनिंग कार्ट प्रोजेक्ट के लिए चुनी गई हैं और 15 फाइनलिस्ट की सूची में जगह बनाई। उनके संक्षिप्त मगर दमदार भाषण को लोगों ने खूब सराहा है।
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प्रिंस विलियम के साथ विनीशा उमाशंकर - फोटो : Twitter : @KensingtonRoyal
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विस्तार
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तमिलनाडु की 15 वर्षीय स्कूली छात्रा विनीशा उमाशंकर जलवायु संकट को लेकर दिए अपने छोटे भाषण से दुनियाभर में मशहूर हो गई हैं। विनीशा ने ग्लासगो में चल रहे संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP26) में बुधवार को अपनी जलवायु परिवर्तन संबंधी अपनी चिंताओं को साझा किया था और पर्यावरण संरक्षण के लिए खोखेले वादे करने वाले  दुनिया भर के नेताओं को खूब सुनाया। मंच पर विनीशा के साथ  ड्यूक ऑफ कैम्ब्रिज प्रिंस विलियम भी शामिल हुए।  इस भारतीय छात्रा ने कॉप 26 के मंच से दुनिया के नेताओं, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, नागरिक समाज और व्यापारिक समूहों से पृथ्वी की रक्षा के लिए नवाचारों, समाधानों और परियोजनाओं का समर्थन करने और अगली पीढ़ी को इसमें शामिल होने की अपील की।
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विनीशा ने मंच से क्या कहा 
विनीशा को प्रिंस विलियम ने बोलने के लिए आमंत्रित किया था। अपने भाषण में, विनीशा ने शिखर सम्मेलन में धीमी गति से की गई चर्चा के बारे में अपनी चिंता जताई। उसने खुद को भविष्य बताते हुए कहा कि आज जो भी कदम उठाए जा रहे हैं इसका परिणाम देखने के लिए उसकी पीढ़ी जीवित रहेगी। उन्होंने कहा लोग बात करना बंद कर दें और काम करना शुरू कर दें।

विनीशा ने आगे जोड़ा 'मेरी पीढ़ी के कई लोग ऐसे नेताओं से नाराज और निराश हैं जिन्होंने खोखले वादे किए हैं और उन्हें पूरा करने में विफल रहे हैं। हमारे पास नाराज होने का हर कारण है, लेकिन मेरे पास गुस्से के लिए समय नहीं है।'
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उन्होंने आगे कहा मैं सिर्फ भारत की लड़की नहीं हूं। मैं इस धरती की बेटी हूं और इस पर मुझे गर्व है।" उन्होंने आगे कहा ‘हम, अर्थशॉट पुरस्कार विजेता और फाइनलिस्ट, इस बात के प्रमाण हैं कि हमारी पृथ्वी के इतिहास में सबसे बड़ी चुनौती भी सबसे बड़ा अवसर है। हम नवाचार की नेतृत्व कर रहे हैं।"

बताया जा रहा है कि विनीशा के इस भाषण को पीएम मोदी, यूके के प्रधानमंत्री बोरिस जानसन और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी सुना। वैश्विक मंच से दिए गए विनीशा का भाषण  सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है। उनका भाषण सुनने के बाद अब लोग उनकी तुलना ग्रेटा थनबर्ग से कर रहे हैं। 


 

आनंद महिंद्रा - फोटो : Pixabay
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विनीशा का भाषण सुनने के बाद वहां मौजूद लोगों ने उनके लिए खड़े होकर तालियां बजाईं। उनकी परियोजना को द अर्थशॉट प्राइज ग्लोबल अलायंस से अब समर्थन प्राप्त होगा और दुनिया भर के परोपकारी और गैर सरकारी संगठन और निजी क्षेत्र उनकी सहायता करेंगे। विनीशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ "एक्सेलरेटिंग क्लीन टेक्नोलॉजी इनोवेशन एंड डिप्लॉयमेंट" का भी हिस्सा बनी थीं।

प्रिंस विलियम ने की सराहना
विलियम ने बाद में विनीशा उमाशंकर की सराहना करते हुए संदेश पोस्ट किया। उन्होंने ट्वीट किया विनीशा को वैश्विक मंच पर बोलते और अपनी पीढ़ी का भविष्य बेहतर करने के लिए बदलाव की मांग करते देख बहुत गर्व हुआ। इससे पहले उन्होंने मंच से कहा था।

आनंद्र महिंद्रा ने की भी तारीफ
पेरिस स्थित वैश्विक मीडिया कंपनी ब्रूट ने विनीशा के भाषण का पांच मिनट 15 सेकंड का वीडियो जारी किया। इस वीडियो को साझा करते हुए महिंद्रा समूह के अध्यक्ष आनंद महिंद्रा ने इस स्कूली छात्रा के भाषण को 'शानदार' बताया है। 66 वर्षीय आनंद महिंद्रा ने कहा कि उमाशंकर की बात में वह दम है जिसे अधिक से अधिक लोगों को सुनना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि उनकी आवाज परिपक्व औऱ संतुलित है। महिंद्रा ने यह भी कहा कि वह सितंबर 2019 से जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थुनबर्ग के प्रशंसक रहे हैं।

 
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ग्रेटा थनबर्ग - फोटो : twitter.com/GretaThunberg
ग्रेटा थनबर्ग कौन हैं
ग्रेटा दुनिया की चर्चित जलवायु कार्यकर्ता हैं।  संयुक्त राष्ट्र क्लाइमेट एक्शन समिट 2019 में प्रभावशाली भाषण देकर जलवायु संकट की गंभीरता की ओर दुनिया का ध्यान खींचा था। वो स्वीडन की रहने वाली है और उनकी उम्र अभी मात्र 18 साल है। ग्रेटा ने साल 2018 में ग्लोबल वॉर्मिंग के लिए लोगों में जागरुकता लाने की मुहिम शुरू की थी। वे स्वीडिश संसद के बाहर लगातार हर शुक्रवार को बैठने लगीं। इसके बाद ही ग्रेटा का नाम पहली बार चर्चाओं में आया। उनका अनुसरण करते हुए कई देशों ने अपने यहां #FridaysForFuture नाम के साथ पर्यावरण बचाने की मुहिम शुरू कर दी। ग्रेटा थनबर्ग ने COP26 शिखर सम्मेलन को विफल बताते हुए कहा है कि दुनिया के नेता सच्चाई से डरते हैं।



 
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