राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता व वरिष्ठ कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस का बहिष्कार संविधान दिवस के खिलाफ नहीं बल्कि भाजपा सरकार की सत्तावादी कार्यप्रणाली के खिलाफ है। हम देश को समझाना चाहते हैं कि सरकार संविधान का सम्मान नहीं कर रही बल्कि इसे कमजोर किया जा रहा है।
शर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सांविधानिक कार्यवाही को दरकिनार कर अपनी मनमानी करते हुए कानून पारित करा रही है। यह संसदीय लोकतंत्र का अपमान है और कांग्रेस इसके विरोध में ही संविधान दिवस आयोजन में शामिल नहीं हुई। यह कार्यपद्धति कई समस्याएं खड़ी कर रही है क्योंकि जब बिना जांच के कानून बनते हैं तो इसका असर सीधे जनता पर होता है। मोदी के परिवारवाद वाले हमले पर शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा, वह खुद इतिहास बदलना चाहते हैं और देश की आजादी के लिए बलिदान देने वालों की स्मृति को मिटा देना चाहते हैं। महात्मा गांधी ने जिस स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया उसमें भाजपा का कोई योगदान नहीं था। आजादी के लिए लड़ने वाले सभी नेता कांग्रेसी थे। भाजपा इन्हीं नेताओं को नजरंदाज कर रही है। भाजपा भली भांति जानती है कि उसके पूर्वजों की स्वतंत्रता संग्राम में कोई भूमिका नहीं थी बल्कि वे तो अंग्रेजों के साथ मिलीभगत करते थे।
पीएम को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए
कांग्रेस नेता ने कहा, भारत में विविधता है और यहां सभी राष्ट्रीय व क्षेत्रीय पार्टियां संविधान के तहत काम करते हैं। प्रधानमंत्री को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। उन्हें अन्य दलों को उपदेश नहीं देना चाहिए। चुनाव आयोग अपना काम करता रहे तो बेहतर होगा। शर्मा ने कहा, 1947 से 2014 तक लोकतंत्र को मजबूती मिली। अगर लोकतंत्र खतरे में होता और संविधान का सम्मान नहीं किया जा रहा होता तो मोदी 2014 में मुक्त व निष्पक्ष रूप से चुनकर नहीं आते। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री और उनके सहयोगियों द्वारा विपक्ष की आलोचना करना अनुचित है।
संसद सत्र से पहले जानबूझकर सरकार करती है ऐसा बर्ताव
शर्मा ने कहा, भाजपा सरकार निरंतर सांविधानिक संस्थाओं, प्रजातांत्रिक प्रणाली पर निरंतर आघात करती है। संसदीय प्रजातंत्र के अंदर प्रतिपक्ष की भूमिका रहती है। देश के संविधान में स्पष्ट है कि सत्ताधारी दल के साथ प्रतिपक्ष अनिवार्य है। लेकिन भाजपा सरकार संसद सत्र से पहले कोई न कोई ऐसा कदम हमेशा उठाती है जिससे तनाव बने और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर जो आवश्यक है, वह सहमति न बन पाए।
दो वर्ष पहले भी सरकारी कार्यक्रम में विपक्ष भी भूमिका नहीं रखी थी
शर्मा ने कहा, दो वर्ष पहले भी यही विषय उठा था। एक सरकारी कार्यक्रम किया गया और विपक्ष की कोई भूमिका नहीं थी। हमारी ऐसी अपेक्षा थी कि उस दिन जो हुआ और विपक्ष के रोष प्रकट करने पर सरकार ऐसे अवसरों पर भविष्य में विपक्ष को सम्मान देगी। ऐसा नहीं हुआ यही कारण है कि कांग्रेस उसके सहयोगी दलों के साथ अन्य विपक्षी दल कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।
सरकार पर मनमानी का आरोप लगा विपक्ष ने किया संविधान दिवस का बहिष्कार
इससे पहले संसद के सेंट्रल हॉल में शुक्रवार को हुए संविधान दिवस कार्यक्रम में 29 अक्तूबर से शुरू हो रहे शीत सत्र के अंजाम की झलक मिल गई। सरकार पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कांग्रेस समेत 15 विपक्षी दलों ने कार्यक्रम का बहिष्कार किया। विपक्ष के बहिष्कार पर लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने निराशा जताई तो सरकार ने इसे संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर का अपमान बताया। विपक्ष इससे पहले 2019 में भी संविधान दिवस का बहिष्कार कर चुका है।
आयोजन के वक्त संसद के सेंट्रल हॉल में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बसपा, आम आदमी पार्टी, सीपीआई, सीपीएम, डीएमके, अकाली, शिवसेना, एनसीपी, टीएमसी, आरजेडी, आरएसपी, केरल एम. आईयूएमएल और एआईएमआईएम के एक भी सांसद मौके पर मौजूद नहीं थे।