काशी में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी
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क्या कांग्रेस पार्टी ऑटो इम्यून डिजीज या सेल्फ गोल सिंड्रोम (अपने ही पाले में गोल करने वाले रोग) का शिकार हो गई है? पांच राज्यों के चुनाव का नतीजा आने के बाद कांग्रेस को लेकर अब विरोधी दलों के नेता भी इसी तरह की टिप्पणी कर रहे हैं। कांग्रेस के नेता और सांसद मनीष तिवारी तो साफ कहते हैं कि चुनाव नतीजों को लेकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से पूछा जाना चाहिए। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार भी बेहद निराश हैं। उत्तराखंड कांग्रेस पार्टी के तीन बड़े नेताओं में गिने जाने वाले सूत्र का कहना है कि हमारी पार्टी का कुछ नहीं हो सकता? बड़े निराश भाव से कहते हैं कि हम अपने ही नेताओं के कारण हार गए। अब कुछ नहीं हो सकता।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन अब तक का सबसे खराब रहा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी की बेटी अराधना मिश्रा रामपुर खास से चुनाव जीतने में सफल रहीं। कांग्रेस ने पिछले 12 चुनाव से इस सीट पर दबदबा बना रखा है। दूसरी फरेंदा विधानसभा सीट है, जहां से 20 साल बाद कांग्रेस सत्ता में लौटी है। लुधियाना से पुराने कांग्रेसी डा. अरुण धवन कहते हैं कि कांग्रेस का तो भगवान ही मालिक है। अब यह पार्टी नेताओं की पहुंच से ऊपर उठ रही है। डा. धवन का कहना है कि अगस्त 2021 तक कांग्रेस पार्टी पंजाब में नंबर वन पर चल रही थी, लेकिन सितंबर में कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद से पंजाब में कभी कांग्रेस खड़ी नहीं हो पाई।
कांग्रेस पार्टी के पूर्व महासचिव का कहना है कि कांग्रेस इस समय खुद के ही रोग से ग्रसित है। पार्टी के नेता एकजुट होकर चुनाव लड़ने, राजनीति करने की बजाय अपने ही नेताओं और पार्टी को नीचा दिखाने में लगे रहते हैं। सूत्र का कहना है कि लोकतंत्र और लोकतांत्रिक पार्टी का यह चरित्र नहीं होता। कांग्रेस जैसी पार्टी का यह भी चरित्र नहीं है कि केवल कुछ लोग ही पार्टी के सभी फैसले लें। पार्टी के फोरम पर किसी फैसले की समीक्षा और उस पर पुनर्विचार की परंपरा ही खत्म हो गई है।
सुरेंद्र त्रिपाठी कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ता हैं। पिछले कई दशक से कांग्रेसी हैं। वह भी पार्टी के कामकाज के तौर तरीके पर एक बड़ा सवाल उठा रहे हैं। त्रिपाठी कहते हैं कि जब से प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की कमान अपने हाथ में ली है, 30 से अधिक वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी छोड़ दी। मनमोहन सिंह की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सूत्र का कहना है कि पार्टी में एक बड़े सुधार की आवश्यकता है। वह कहते हैं कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इस मांग को उठाया था। उन्हें गुट 23 कहा गया और उनमें से कई नेता अब पार्टी को छोड़कर भाजपा के साथ जा चुके हैं।