कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को कोरोना वायरस को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) पर कई आरोप लगाए। कांग्रेस ने आईसीएमआर पर अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए कोरोना महामारी से जुड़े तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया। पार्टी ने मांग की कि इस मामले में आपराधिक जांच होनी चाहिए।
पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता अजय माकन ने कहा कि इस जांच के दायरे में आईसीएमआर के शीर्ष अधिकारियों के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को भी लाया जाना चाहिए।
उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘इकोनॉमिस्ट’ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस पत्रिका के अनुसार, भारत में कोरोना के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा 43 लाख से 68 लाख के बीच हो सकता है।
माकन ने यह भी दावा किया कि आईसीएमआर के कुछ प्रमुख वैज्ञानिकों को हटना पड़ा क्योंकि सरकार की ओर से दबाव बनाया जा रहा था। इन लोगों ने जो बातें सामने रखी हैं वो बहुत गंभीर हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए कई बातें छिपाई गईं जिससे कोरोना की दूसरी लहर से पहले सावधानी नहीं बरती गई।
माकन के अनुसार, इन वैज्ञानिकों ने कहा है कि लॉकडाउन के मामूली असर से जुड़े अध्ययन को दबाव बनाकर वापस करवाया गया। आईसीएमआर पर दबाव बनाया गया और कहलवाया गया कि भारत में कोविड 19 तेजी से नहीं फैल रहा है। आईसीएमआर के अध्ययन में यह स्पष्ट हो गया था कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और ब्लड प्लाज्मा से कोई फायदा नहीं है, लेकिन इस तथ्य को भी छिपाया गया है। इससे जनता को नुकसान हुआ।
माकन ने आरोप लगाया कि आईसीएमआर अपने काम में नाकाम रहा। अगर सही समय पर सही कदम उठाया गया होता तो लाखों लोगों की जान नहीं जाती। प्रधानमंत्री ने कहा था कि कोरोना के खिलाफ जंग जीत ली गई। उस समय के स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने भी कहा था कि कोरोना को हरा दिया गया, इसके चलते लोगों ने लापरवाही बरती।
माकन ने कहा कि इन वैज्ञानिकों ने जो कहा है कि उससे लगता है कि इसमें आईसीएमआर की आपराधिक संलिप्तता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उस समय के स्वास्थ्य मंत्री भी संलिप्त हैं। आईसीएमआर के प्रमुख लोगों, प्रधानमंत्री और तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री के विरूद्ध आपराधिक जांच होनी चाहिए।