फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कांग्रेस ने सरकारी उपक्रमों को बेचने पर कहा- सरकार क्या सिर्फ नॉर्थ-साउथ ब्लॉक में ही दिखेगी

Sat, 06 Mar 2021 03:17 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
विज्ञापन
राजीव शुक्ला - फोटो : ANI
विज्ञापन

कांग्रेस ने सरकारी उपक्रमों को बेचने के केंद्र सरकार के फैसले पर कहा कि क्या सरकार सिर्फ नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में ही दिखेगी। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि एक ओर सरकार जनता पर महंगाई का बोझ डाल रही है और वहीं जनता के पैसे से खड़े किए सरकारी उपक्रमों को निजी हाथों में सौंपने का फैसला ले रही है। सरकार को अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

विज्ञापन


पार्टी का आरोप, जनता की कमाई से चल रहे कमाऊ उपक्रमों को बेचने की तैयारी
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि देश नहीं बिकने दूंगा जबकि जनता की कमाई से चल रहे कमाऊ सरकारी संस्थानों को बेचने का फैसला ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया जैसे उपक्रम को पूर्ववर्ती सरकारों ने इसलिए शुरू किया था क्योंकि इस सेक्टर में निजी समूह न तो पैसे लगाने और न ही जोखिम उठाने को तैयार थे। अभी भी निजी समूह उन्हीं संस्थानों और उपक्रमों को खरीदेंगे जिसमें कई एकड़ जमीन और अन्य संपत्ति जुड़ी होगी।

उन्होंने कहा कि सरकार के लाख प्रयास के बाद भी एयर इंडिया नहीं बिक रहा है क्योंकि निजी कंपनियां न तो इतना पैसा लगाने को तैयार हैं और न ही जोखिम उठाना चाहती हैं। उन्हें तो वहीं उपक्रम चाहिए जो लाभ दे रहे हैं या फिर जिनके साथ बड़ी संपत्ति जुड़ी है।
विज्ञापन


कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह लगातार मोदी सरकार के गलत फैसलों की ओर इंगित कर रहे हैं। अगर सरकार देश भर में सरकारी बैंक, उपक्रम आदि बेच देगी तो सरकार कहां दिखेगी उसके पास सिर्फ नॉर्थ और साउथ ब्लॉक रह जाएगा।
 

वहीं पार्टी प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने कहा कि सरकार ‘हम दो हमारे दो, जो भी मिले बेच दो’ के फॉर्मूले पर चल रही है। आज कोई भी क्षेत्र देख लें जो कुछ भी बिक रहा है, दो समूहों के पास ही जा रहा है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय के अंदर एक दीपम विभाग काम करता है जिसका काम विनिवेश करना है।

जबकि उसके तहत निजीकरण का ड्राइव चलाया जा रहा है और इसका लाभ दो लोगों को ही मिल रहा है, मिलने वाला है या मिलेगा। हवाई अड्डे, कोल, शिपिंग कारपोरेशन को कौन खरीदेगा, किसने खरीदा है देश जानता है। निजीकरण के नाम पर देश की जनता की कमाई से बने उपक्रम सरकार दो समूहों के हवाले करने का काम कर रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें