'राष्ट्रवाद' का मुद्दा अधिकांश अवसरों पर भाजपा खेमे में ही दिखाई देता रहा है। मौजूदा समय में कोरोना वैक्सीन के मामले ने देश का राजनीतिक सीन कुछ हद तक बदल दिया। अब भाजपा के 'उत्सव' और कांग्रेस के 'राष्ट्रवाद' के बीच जोरदार मुकाबला चल रहा है। राहुल गांधी ने 'उत्सव' पर अप्रत्यक्ष सवाल उठाकर भाजपा को घेरने का प्रयास किया कि सरकार ने टीके का निर्यात कर देश में जानबूझकर इसकी कमी होने दी। राहुल गांधी ने सोमवार को एक वीडियो ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने कहा कि कोरोना वैक्सीन देश की जरूरत है। 'सुरक्षित' जीवन तो सबका हक है। इसके थोड़ी देर बाद प्रियंका गांधी ने भी ट्वीट कर दिया। उन्होंने लिखा, 'वैक्सीन बाहर भेजने की बजाए सरकार हर भारतीय को वैक्सीन देने पर ध्यान लगाए।' जानकारों का कहना है कि कोरोना वैक्सीन की कमी को आधार बनाकर कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी गुल खिलाने के प्रयासों में जुटे हैं।
कांग्रेस पार्टी ने देश में कोरोना वैक्सीन की स्थिति को लेकर भाजपा के 'राष्ट्रवाद' स्टाइल में बोलना शुरू कर दिया। पिछले दो दिन से इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है। इस बार पीएम मोदी और उनकी सरकार पर तीखे बाण चलाने की बजाए कांग्रेस पार्टी ने 'सवालों की बौछार' पर फोकस किया। यानी मुद्दा इस तरह से उठाया जाए, जिससे जनता को विषय की गहराई समझने में देर न लगे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी कोरोना वैक्सीन को लेकर तीन दिन पहले 'राष्ट्रवाद' की मुद्रा में ही भाजपा को घेरने का प्रयास किया था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर कोरोना महामारी में कुप्रबंधन का आरोप लगाया था। साथ ही, कहा सरकार ने टीके का निर्यात किया, जिससे देश में इसकी कमी हो गई। हमें सबसे पहले भारत में टीकाकरण अभियान पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी था। इसके बाद ही टीके का निर्यात करना और दूसरे देशों को तोहफे देना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सरकार का बचाव करते हुए राहुल गांधी पर निशाना साध दिया। प्रसाद ने भी सवाल के अंदाज में पूछ लिया, 'राहुल गांधी बताएं कि उन्होंने कोरोना की वैक्सीन क्यों नहीं लगवाई? राहुल गांधी को यह पता होना चाहिए कि कांग्रेस शासित राज्यों में टीकों की कमी नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य देखभाल की बुनियादी प्रतिबद्धता में कमी है। उन्हें अपनी पार्टी की सरकारों को पत्र लिखकर वसूली रोकने को कहना चाहिए।'
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि भारत टीकाकरण के मामले में अमेरिका से भी आगे है। कुछ राज्य, जहां कांग्रेस पार्टी की सरकार है या वह पार्टी बतौर सहयोगी के तौर पर सरकार में शामिल है, वहां राजनीति हो रही है। इस कड़ी में महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ सबसे आगे हैं। छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने तो कई माह तक वैक्सीन का इस्तेमाल ही नहीं किया। वैक्सीन को लेकर भाजपा की केंद्र सरकार पर आग बबूला होने वाले महाराष्ट्र को ही सबसे ज्यादा कोरोना वैक्सीन मुहैया कराई गई है।
राहुल गांधी ने अपने ट्विटर पर जो वीडियो डाला, उसका शीर्षक है, कोरोना वैक्सीन देश की जरूरत है। आप भी इसके लिए अपनी आवाज बुलंद कीजिए। सबको हक है सुरक्षित जीवन का। इसमें दिखाया गया है कि कोरोना को लेकर देश में चिंता का माहौल है। इस महामारी के लाखों केस रोजाना सामने आ रहे हैं। देश में ऐसे अनेक सेंटर हैं, जहां कोरोना वैक्सीन नहीं है। सैकड़ों सेंटरों पर वैक्सीन और दूसरी दवाओं की भारी कमी है। ऐसी विकट परिस्थितियों में दूसरे देशों को कोरोना वैक्सीन निर्यात की जा रही है। वैक्सीन के निर्यात पर तत्काल रोक लगाई जाए।
दूसरी ओर कोरोना वायरस के खिलाफ जंग तेज करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी 11 अप्रैल से 'टीका उत्सव' की शुरुआत कर चुके हैं। यह 'उत्सव' 14 अप्रैल तक जारी रहेगा। पीएम मोदी ने कहा कि यह उत्सव एक प्रकार से कोरोना के खिलाफ दूसरी बड़ी जंग की शुरुआत है। इसमें हमें पर्सनल हाईजीन के साथ ही सोशल हाईजीन पर विशेष बल देना है। ऐसे में केंद्र सरकार के अलावा भाजपा शासित प्रदेशों की राज्य सरकारों ने 'उत्सव' मनाना शुरू कर दिया। दूसरी तरफ कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कोरोना के तेजी से बढ़ते केसों के मद्देनजर देश लॉकडाउन की तरफ अग्रसर है। ऐसे में सरकार को विदेशों में वैक्सीन भेजनी बंद कर देनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी के ये शब्द 'राष्ट्रवाद' को समझने के लिए काफी हैं कि हमें सबसे पहले भारत में टीकाकरण अभियान पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। इसके बाद टीके का निर्यात किया जाए। पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने भी ट्विटर पर कोरोना वैक्सीन को लेकर वीडियो साझा किया। इसमें उन्होंने कहा, 'क्योंकि सबके लिए वैक्सीन जुमला न बनें। क्योंकि सरकार इवेंट से ज्यादा जनता पर ध्यान दे। क्योंकि सबको जानने का हक है कि पीएम केयर के नाम पर इकट्ठा फंड कहां खर्च हो रहा है। क्योंकि वैक्सीन बाहर भेजने की बजाए सरकार हर भारतीय को वैक्सीन देने पर ध्यान लगाए।
गौरतलब है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय 85 दिन में 10 करोड़ टीके लगाए जाने की जानकारी दे चुका है। ऐसे में भारत दुनिया का सबसे तेज टीकाकरण अभियान चलाने वाला देश बन गया। अमेरिका को टीके की 10 करोड़ खुराक देने में 89 दिन लगे, जबकि चीन को इस काम में 102 दिन लग गए। भारत ने कोरोना वैक्सीन की 583 लाख डोज अब तक 69 देशों को भी दीं। इनमें बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल, भूटान, बहरीन, साउथ अफ्रीका, ओमान, इजिप्ट, कुवैत, अफगानिस्तान, मालदीव, श्रीलंका व म्यांमार जैसे देश शामिल हैं। खास बात यह है कि इनमें कुछ वैक्सीन मैत्री के तहत फ्री में मुहैया कराई गईं। मैत्री के तौर पर 79.75 लाख वैक्सीन डोज फ्री पहुंचाई गईं, जबकि 338.4 लाख डोज कॉमर्शियल तौर पर दी गईं।