ठगी की औसत राशि चार से पांच गुना हो गई है
कांग्रेस नेता के मुताबिक यदि हम पिछले तीन सालों पर भी केंद्रित हों, तो ठगी की औसत राशि 2018-19 में 10.5 करोड़ रुपये से बढ़कर 2019-20 में 21.3 करोड़ रुपये हो गई है। 2020-21 में 18.8 करोड़ रुपये पर जा पहुंची है। 2014-15 में ठगी की औसत राशि 4.2 करोड़ रुपये थी। 2014-15 की तुलना में, 2019-20 व 2020-21 में ठगी की औसत राशि 4 से 5 गुना हो गई है। आरबीआई के अनुसार, ठगी होने की तारीख और ठगी का पता चलने की तारीख के बीच का औसत समय 2020-21 में सूचित की गई ठगी के लिए 23 महीने और 2019-20 में सूचित की गई ठगी के लिए 24 महीने था। 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की बड़ी ठगी के लिए, 2020-21 में यह औसत समय 57 महीने और 2019-20 में 63 महीने था। इसलिए वित्तवर्ष 2020-21 में सामने आई ठगी वित्तवर्ष 2018-19 में कम करके दिखाई गई। बड़ी राशि की ठगी वित्त वर्ष 2015-16 में कम दिखा दी गई। आरबीआई द्वारा दिए गए विवरण अर्थव्यवस्था की स्थिति एवं बैंकों से की गई ठगी की ज्वलंत वास्तविकता पर रोशनी डालते हैं। इससे साबित हो जाता है कि मोदी सरकार 'बातें करे हजार, काम के मामले में फरार' सरकार है।
मोदी सरकार से मांगे इन सवालों के जवाब...
गौरव वल्लभ ने पूछा है कि पिछले सात सालों में मोदी सरकार बैंकों से की जा रही ठगी को रोकने में विफल क्यों हो गई। इन सभी मामलों में बैंक से ठगी गई रकम को वापस लाने के लिए मोदी सरकार क्या कर रही है। हमारी बैंकिंग व्यवस्था को कमजोर करने वाले इन ठगों से कितना पैसा अभी तक वसूला गया है। मोदी सरकार ने बैंकों से ठगी गई रकम को वसूलने का कोई प्रयास न करते हुए ठगों को देश में ही काम करते रहने या फिर देश छोड़कर भागने का मौका देकर बैंकिंग व्यवस्था को कमजोर किया है। केंद्र सरकार ने सरकारी बैंकों को पर्याप्त कैपिटल स्पोर्ट भी नहीं दिया। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि मोदी सरकार इन ठगों पर कठोर कार्यवाही करे और उनके द्वारा ठगी गई पूरी रकम, जो हमारे देश की संपत्ति है, उसे जल्द से जल्द वसूला जाए।
प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में ही सबसे बड़ा फ्रॉड हुआ है। पिछले सात सालों में यह राशि पांच लाख करोड़ रुपये पर पहुंच चुकी है। 2014-15 में फ्रॉड 19,455 करोड़ रुपये था, जो 2020-21 में बढ़कर 1 लाख 38 हजार 422 करोड़ रुपये है। ध्यान रहे 2020-21 में 6 महीने तक का मोरेटोरियम था और तीन महीने तक लोन रिस्ट्रक्चरिंग थी। उसके बावजूद ये फ्रॉड हुआ है।
कौन लोग हैं जो बैंकों को चूना लगाकर जा रहे हैं...
प्रो वल्लभ ने कहा, वे कौन लोग हैं, जो बैकों को चूना लगाकर जा रहे हैं। पहले औसत फ्रॉड 2014-15 में 4 करोड़ 20 लाख रुपये था। आज वह बढ़कर लगभग 20 करोड़ रुपये हो गया है। सरकार अपनी जिम्मेदारी से अब नहीं बच सकती। सरकार को बताना पड़ेगा कि देश में वे कौन लोग हैं, जो 5 लाख करोड़ रुपये का फ्रॉड करके देश में बैठे हैं या दुनिया के सूदूर इलाकों में चले गए हैं। मोदी सरकार की लोगों के बैंक खातों में 15 लाख रुपये डालने की बात, खत्म हो गई। मोदी ने कहा 2024 तक पांच ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बना देंगे, वह बात भी खत्म। मोदी ने कहा, किसानों की आय दोगुनी कर देंगे, वह भी खत्म। सौ स्मार्ट सिटी बनाने की बात खत्म। अब मोदी बोल रहे हैं कि 31 दिसम्बर तक सबको वैक्सीनेट कर देंगे। कांग्रेस नेता ने कहा, कैसे करेंगे। कहां है आपके पास सप्लाई, कितनी सीरिंज की जरुरत पड़ेगी, सीरिंज कौन देगा, 280 करोड़ का आप ब्यौरा दीजिए।
अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा असर पड़ने की आशंका नहीं ...
मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रह्मण्यम का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर का भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा असर पड़ने की आशंका नहीं है। हालांकि उन्होंने महामारी की आगे की राह को लेकर जो अनिश्चितता बनी है, उसके बारे में आगाह किया है। महामारी की वजह से पैदा हुई परिस्थितियों को देखते हुए यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि क्या मौजूदा वित्तीय वर्ष में देश की आर्थिक विकास दर दोहरे अंकों में (दस या दस फीसदी से ऊंची) होगी। इस साल जनवरी में जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 में मार्च 2022 में समाप्त होने वाले मौजूदा वित्तीय वर्ष में 11 फीसदी की आर्थिक विकास दर का अनुमान लगाया गया था। आगे बढ़ते समय अर्थव्यवस्था के लिए वित्तीय और मौद्रिक सहायता महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि इससे कोविड-19 की एक और लहर की आशंका को कम करने में मदद मिलेगी। सुब्रह्मण्यम ने मुद्रास्फीति को लेकर कहा कि इसके अनुमानित सीमा में रहने की उम्मीद है और यह निर्धारित सीमाओं से ऊपर नहीं नहीं जानी चाहिए। सामान्य मानसून की उम्मीद के साथ इस वित्तीय वर्ष में खाद्यान्नों का रिकॉर्ड उत्पादन होने का अनुमान है। पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने अर्थव्यवस्था की लिहाज से 2021-21 को पिछले चार दशक का 'सबसे अंधकारमय' साल करार दिया है। उन्होंने यह आरोप लगाया है कि कोरोना महामारी के साथ ही सरकार के 'अकुशल एवं अक्षम आर्थिक प्रबंधन' से हालात और बिगड़ते चले गए।