कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लोकसभा में चंद्रयान-3 की सफलता और अंतरिक्ष क्षेत्र में हमारे राष्ट्र की अन्य उपलब्धियां’’ विषय पर अपना विचार रखा। इस विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता कई सरकारों की सफल प्रयास के बाद ही संभंव हुआ है। इसलिए सफलता का श्रेय किसी एक व्यक्ति या सरकार को नहीं जाता है।
थरूर ने कहा, 'भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान के लंबे कालखंड में पंडित (जवाहरलाल) नेहरू के योगदान को कौन नहीं मानेगा। आज भारत की वैज्ञानिक सोच पंडित नेहरू की वजह से है।' शशि थरूर ने इस चर्चा में अपने संसदीय क्षेत्र तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई ने वैज्ञानिक अनुसंधान से संबंधित महत्व को समझकर ही देश में अंतरिक्ष अनुसंधान की नींव यहां रखी थी।
कांग्रेस सांसद ने 1960 के दशक में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र की स्थापना से लेकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना के इतिहास और आंतरिक्ष में भारत की सफलताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश के युवा भले ही आईआईटी जैसे संस्थानों की तरफ आकर्षित होते हैं, लेकिन चंद्रयान-3 की सफलता के पीछे शामिल वैज्ञानिक किसी भी 'ग्लैमरस’ पृष्ठभूमि से नहीं आते हैं। ये सभी वैज्ञानिक तमिलनाडु, केरल और अन्य राज्यों के छोटे इंजीनियरिंग कॉलेजों से पढ़कर निकले हैं।
थरूर ने बताया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महिलाओं की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है और आने वाले दिनों में उनकी संख्या 90 फीसदी तक हो सकती है। उन्होंने आगे कहा कि महिलाएं जिस तरह से आगे बढ़ रही हैं, उन्हें किसी भी तरह के आरक्षण की जरूरत नहीं है।
हालांकि, थरूर के इस बयान पर वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने आपत्ति जताई। जिसके बाद कांग्रेस सांसद ने सफाई देते हुए कहा कि उनका इरादा महिलाओं या महिला सांसदों के प्रति किसी प्रकार का असम्मान प्रकट करना नहीं है। थरूर ने भारत की अंतरिक्ष क्षेत्र में कम बजट के साथ तेजी से आगे बढ़ने की सराहना की है। उन्होंने बताया कि इसरो के पिछले 40 वर्ष का खर्च नासा के छह महीने के व्ययके बराबर है।