केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान, जिनकी तैनाती जोखिम भरे इलाकों में रहती है, उनकी हवाई यात्रा सेवा रोकने को लेकर कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महासचिव एवं प्रभारी, संचार विभाग रणदीप सिंह सुरजेवाला ने शुक्रवार को इस संबंध में एक बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है, सड़क पर चलने वाले 'CAPF' काफिलों को आतंकवादी, आसानी से निशाना बना सकते हैं। जवानों की हवाई यात्रा सुविधा को अविलंब शुरू किया जाए। देश अभी पुलवामा के आतंकी हमले को भूला नहीं है, जिसमें देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के 40 से अधिक जवान शहीद हो गए थे। अमर उजाला डॉट कॉम ने सबसे पहले चार अप्रैल को 'केंद्रीय अर्धसैनिक बलों से छिनी हवाई यात्रा सुविधा: कश्मीर से उत्तर पूर्व तक के जोखिम भरे क्षेत्रों में करना होगा सड़क मार्ग से सफर' इस शीर्षक से खबर ब्रेक की थी।
पहली अप्रैल से केंद्रीय सुरक्षा बलों के लिए कश्मीर और उत्तर पूर्व के जोखिम भरे इलाकों में आवाजाही करने के लिए हवाई यात्रा सुविधा को रोक दिया गया है। अब जवानों को काफिला बनाकर वह रास्ता तय करना होगा। हवाई यात्रा सेवा की नोडल एजेंसी बीएसएफ ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ पत्राचार किया है। दिल्ली-श्रीनगर-दिल्ली और श्रीनगर-जम्मू-श्रीनगर रूट पर हवाई यात्रा सुविधा के लिए मंजूरी देने वाली फाइल केंद्रीय गृह मंत्रालय में भेजी गई है। यह मंजूरी पहली अप्रैल से 31 जुलाई तक की मिलनी है।
रणदीप सुरजेवाला ने कहा, पुलवामा के शहीदों के नाम पर युवाओं का पहला वोट मांगकर झूठे राष्ट्रवाद के आंसू बहाने वाली मोदी सरकार ने घाटी में आवाजाही के लिए सैनिकों की 'हवाई कुरियर सेवा' फिर निलंबित कर दी है। कांग्रेस नेता के अनुसार, रक्षा और गृह मंत्रालयों से अनुमति न मिलने के कारण कश्मीर घाटी में रोजाना आने जाने वाले सैनिकों के लिए हवाई कुरियर सेवा एक अप्रैल से बंद कर हमारे सैनिकों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।
कांग्रेस महासचिव के अनुसार, दुर्भाग्य है कि मोदी सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। हम मांग करते हैं कि सैनिकों की सुरक्षा को देखते हुए ये हवाई आवागमन की सेवा तत्काल बहाल करके सरकार सैनिक व अर्धसैनिक बलों की जान जोखिम में डालने के लिए देश से माफी मांगे। हम देशवासियों को याद दिलाएंगे कि किस तरह यही कूरियर सेवा बंद होने के कारण 14 फरवरी, 2019 को पुलवामा के आतंकी हमले में 44 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे। यह हमला इसलिए संभव हो पाया था कि इस बेहद संवेदनशील इलाके से सीआरपीएफ के जवान, बसों के जरिए ड्यूटी करने जा रहे थे। उन्हें मोदी सरकार ने ड्यूटी स्थल तक ले जाने के लिए हवाई सुविधा तब भी उपलब्ध नहीं कराई थी। पुलवामा में हुए हमले के बाद कांग्रेस पार्टी की मांग और इस आशय की खबर छपने के बाद मोदी सरकार ने जवानों के लिए दोबारा से आनन-फ़ानन में एयर कूरियर सर्विस' बहाल की थी, जो अब 01 अप्रैल 2022 से फिर समाप्त कर दी गई है।
सेवा के निलंबित होने का मतलब है कि जम्मू-कश्मीर में तैनात जवानों को अब रेल या सड़क मार्ग के जरिए आवाजाही करनी होगी। ये लापरवाही तब है जब सरकार अच्छी तरह से जानती है कि जम्मू कश्मीर में लगभग तीन सौ किलोमीटर का क्षेत्र जोखिम भरा है। ऐसे क्षेत्रों में आईईडी, हैंड ग्रेनेड, ड्रोन और आत्मघाती हमले का अंदेशा हमेशा बना रहता है। अर्धसैनिक बलों की हवाई यात्रा बंद होने से अब दोबारा उसी तरह के काफिलों की शुरुआत हो सकती है। इन काफिलों को आसानी से आतंकवादी निशाना बना सकते हैं। इससे खर्चा भी बढ़ेगा, क्योंकि जवानों की सुरक्षा के मद्देनजर भारी संख्या में रोड ओपनिंग पार्टियां लगानी पड़ेंगी। बतौर रणदीप, कश्मीर में तैनात अर्धसैनिक बलों के आने-जाने के लिए 01 जनवरी, 2018 को दिल्ली-श्रीनगर हवाई सेवा शुरू की गई, लेकिन वित्तीय कारणों से इसे सिर्फ सात महीने चलाकर 31 जुलाई, 2018 को बंद कर दिया गया। इसके कारण फरवरी 2019 को हमला हो गया। इस हमले को भाजपा ने ने 2019 में हुए आम चुनाव में पूरी निर्लज्जता से खूब भुनाया।
अब एक बार फिर से वही हो रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा अर्धसैनिक बलों के लिए 'एयर कूरियर सर्विस' ऐसे वक्त में बंद की गई है, जब घाटी के ऊंचे पहाड़ों पर बर्फ पिघलनी शुरू हो गई है। आतंकवादी हमलों का खतरा ऐसे में चरम पर होता है और घाटी में पिछले कुछ दिनों में कई आतंकी हमले भी हुए हैं। हमारे जवान देश की हिफाजत करते हैं तो सरकार का भी फर्ज बनता है कि उन्हें जरूरी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई जाएं, लेकिन मोदी सरकार यहां भी विफल दिख रही है। हम सरकार से तत्काल सैनिक व अर्धसैनिक बलों के लिए तत्काल हवाई कूरियर सेवा की बहाली की मांग करते हैं।