इस कारण भी कांग्रेस को मिल रहा बल
अरविंदर सिंह लवली इसके पहले भी प्रदेश की कमान संभाल चुके हैं। अपने पिछले कार्यकाल में वे पार्टी के लिए कोई बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सके थे। इसके बाद भी यदि लोगों में उन्हें लेकर इतनी उम्मीद है तो इसके कुछ कारण समझे जा सकते हैं।
दरअसल, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा ने उनमें उत्साह भर दिया है। उन्हें लगता है कि जिस तरह पूरे देश में कांग्रेस वापस करती दिखाई पड़ रही है, आने वाले समय में दिल्ली में भी पार्टी की वापसी हो सकती है। इस समय हो रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को कई राज्यों में अपनी वापसी होने की उम्मीद है। यदि पार्टी के लिए नतीजे सकारात्मक रहे तो दिल्ली की राजनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है।
दूसरा बड़ा कारण है कि पूरे देश में कांग्रेस का परंपरागत मुसलमान मतदाता उसके पास वापस आ रहा है। दिल्ली में तो वह नगर निगम चुनाव के समय भी कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़ा दिखाई पड़ा। ऐसे में कांग्रेस को लगता है कि दिल्ली में भी लोकसभा चुनाव में मुसलमान मतदाता उसके साथ आएगा। पिछले लोकसभा चुनाव में भी मुसलमान मतदाता कांग्रेस के साथ खड़ा रहा था, जिसके कारण कांग्रेस ने हर सीट पर मजबूत लड़ाई लड़ी और हर सीट पर दूसरे नंबर पर आई।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कारण दलित और अन्य पिछड़े समुदाय के मतदाता पार्टी से जुड़ रहे हैं। यह ट्रेंड कर्नाटक से शुरू होने के बाद दूसरे राज्यों में भी दिखाई पड़ रहा है। इस समय दिल्ली में कांग्रेस में वापसी करने वाले नेताओं-कार्यकर्ताओं में भी यह वर्ग सबसे ज्यादा है। खरगे भी इसका एक कारण हो सकते हैं। पार्टी को लगता है कि वह अपने पुराने परंपरागत वोट बैंक को साथ लाकर दिल्ली की राजनीति में मजबूत वापसी करने में सफल हो सकती है।