नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने से इसके कारण पड़ने वाले असर को भांपते हुए कई राजनीतिक दलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। बढ़ते विरोध को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कड़े शब्दों में कह दिया है कि केंद्र सरकार को नागरिकता से संबंधित कानून बनाने और उन्हें लागू करने का अधिकार है। इसे निरस्त करना संभव नहीं है। हालांकि, अब विपक्षी दलों ने उनको आड़े हाथ ले लिया है। उनका कहना है कि वह पश्चिम बंगाल और असम में चुनाव जीतने के लिए अपना पहले वाला हथियार फिर से इस्तेमाल कर रहे हैं।
अमित शाह ने एक इंटरव्यू में विपक्षी नेताओं पर 'तुष्टिकरण की राजनीति' करने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा कि सीएए मोदी सरकार द्वारा लाया गया है। इसे रद्द करना संभव नहीं है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद सभी राजनीतिक दल साथ आएंगे और सहयोग करेंगे।
क्या आपके पास अधिकार है?
गृह मंत्री शाह ने सवाल करते हुए कहा, 'क्या आपके पास अधिकार है कि आप इसके लागू होने से इनकार कर सकते हैं?' उन्होंने कहा कि यह लोग समझते हैं कि उनके पास अधिकार नहीं है। हमारे संविधान में नागरिकता से संबंधित कानून बनाने का अधिकार केवल संसद को दिया गया है। कानून और उसके लागू करने का अधिकार केंद्र का क्षेत्र है, न कि राज्य का।
उन्होंने आगे कहा, 'हमारे संविधान का अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता के संबंध में नियम बनाने की सारी शक्तियां देता है। मुझे लगता है कि चुनाव के बाद हर कोई सहयोग करेगा। वे तुष्टिकरण की राजनीति के लिए दुष्प्रचार कर रहे हैं।'
ममता पर वार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा। कहा कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख शरणार्थियों और घुसपैठियों के बीच का अंतर नहीं समझती हैं। उन्होंने कहा, 'मैं ममता बनर्जी से अपील करना चाहता हूं। राजनीति के लिए कई मंच हैं। कृपया बांग्लादेश से आए बंगाली हिंदुओं का विरोध न करें। आप खुद बंगाली हैं। मैं उन्हें खुली चुनौती दे रहा हूं और उन्हें हमें यह बताना चाहिए कि इस कानून में कौन सा भाग किसी की नागरिकता छीन रहा है। वह सिर्फ डर पैदा कर रही हैं और वोट बैंक को मजबूत करने के लिए हिंदुओं और मुसलमानों के बीच विभाजन पैदा कर रही हैं।'