विरोध करते SSC GD 2018 के आवेदक
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केंद्र सरकार खर्च घटाने पर खासा जोर देर रही है। पिछले साल भी सरकारी विभागों का खर्च कम करने के लिए कई तरह के उपाय किए गए थे। इस बार केंद्र सरकार ने सभी मंत्रालयों और विभागों की कई मदों में बीस फीसदी तक की कटौती करने की घोषणा कर दी है। ऐसे समय में कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह और एसएससीजीडी 2018 के बेरोजगार युवाओं ने सरकार को खर्च घटाने की तरकीब बताई है। रणबीर सिंह कहते हैं, एसएससीजीडी का टेस्ट पास कर मेडिकल जांच की प्रक्रिया में सफल हो चुके 55 हजार युवाओं को सरकार ज्वाइनिंग प्रदान कर दे। इससे नई भर्ती और ट्रेनिंग पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपये बच जाएंगे। दूसरी तरफ इन 55 हजार युवाओं को केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में सिपाही की नौकरी मिल जाएगी। बतौर सिंह, ये घाटे का सौदा नहीं है।
बता दें कि एसएससीजीडी के तहत सीएपीएफ में सिपाही के पदों पर भर्ती के लिए 2018 में विज्ञापन निकला था। दिक्कत यह हुई कि इस परीक्षा का रिजल्ट चौथे साल में यानी 2021 में आया है। इसके चलते दो तिहाई उम्मीदवार तो ओवरएज हो गए। उनके पास दूसरा चांस ही नहीं बचा। आवेदकों का कहना है कि गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने तीन साल पहले संसद में यह बयान दिया था कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में सिपाही के 1,11,000 पद खाली हैं। साल 2018 में 60,210 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। कुछ माह पहले जब रिजल्ट आया तो 54,000 पद ही भरे गए। बाकी के 55,000 अभ्यर्थी जो कि मेडिकल फिट होते हुए भी बेरोजगार बनने पर मजबूर हो गए। सरकार ने आधे युवाओं को रोजगार दिया और आधे युवाओं को बेरोजगार छोड़ दिया।
रणबीर सिंह बताते हैं कि इसे लेकर राष्ट्रपति भवन से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक का दरवाजा खटखटा चुके हैं। रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय में भी ज्ञापन देकर मांग की गई है कि इन 55 हजार मेडिकल पास आवेदकों को नियुक्ति पत्र दें। अब कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ये आवेदक ट्विटर के जरिए अपनी बात सरकार तक पहुंचा रहे हैं। मंगलवार को सुबह 11 बजे से ही 55 हजार युवाओं के लाखों परिजनों ने ट्विटर पर सरकार से आग्रह किया है कि इन बच्चों का करियर तबाह न किया जाए। अधिकांश युवा गरीब और मजदूर परिवारों से हैं। कई अभ्यार्थी तनाव में आकर आत्महत्या जैसा कदम उठा चुके हैं।
रणबीर सिंह के मुताबिक, ये उम्मीदवार कमजोर नहीं हैं। इन्होंने परीक्षा के सभी चरण पास किए हैं। अगर परीक्षा का रिजल्ट चार साल में आता है तो उसके लिए दोषी इन युवाओं को नहीं ठहरा सकते। इसके लिए सिस्टम जिम्मेदार है। अगर एसएससी द्वारा यह भर्ती एक साल के भीतर पूरी करा दी जाती तो उन आवेदकों के पास दूसरा और तीसरा चांस भी रहता जो किन्हीं कारणों से पास नहीं हो पाते। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में एक लाख से ज्यादा रिक्तियां खाली पड़ी हैं और दूसरी तरफ 55 हजार मेडिकल फिट अभ्यर्थी मौजूद हैं। ऐसे में नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत कहां से आ पड़ी। नई भर्ती पर करोड़ों रुपए खर्च होंगे। समय की बर्बादी भी होगी। केंद्र सरकार इन सभी युवाओं को नियुक्ति पत्र देकर इन्हें सीएपीएफ में भर्ती होने का मौका दे सकती है। ऐसा करने से सरकार के करोड़ों रुपये बच जाएंगे।