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Karnataka: 'सड़क हादसे में मुआवजे के दावे को आपराधिक मामलों की तरह साबित करना जरूरी नहीं', हाईकोर्ट की टिप्पणी

Tue, 29 Aug 2023 10:54 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु

सार

खंडपीठ दो अपीलों पर सुनवाई कर रही थी। पहली अपील बजाज आलियांज इंश्योरेंस द्वारा दायर की गई थी और दूसरी दिवाकर एमआर के माता-पिता चिक्का थायम्मा और रामे गौड़ा द्वारा दायर की गई थी, जिनकी 13 अगस्त, 2019 को एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।
 
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कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सड़क दुर्घटनाओं में मुआवजे के दावों से संबंधित मामलों को आपराधिक मुकदमे की तरह साबित किए जाने की जरूरत नहीं है। कर्नाटक हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति के सोमशेखर और न्यायमूर्ति राजेश राय के की खंडपीठ ने मंगलवार को यह टिप्पणी की। 

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खंडपीठ दो अपीलों पर सुनवाई कर रही थी। पहली अपील बजाज आलियांज इंश्योरेंस द्वारा दायर की गई थी और दूसरी दिवाकर एमआर के माता-पिता चिक्का थायम्मा और रामे गौड़ा द्वारा दायर की गई थी, जिनकी 13 अगस्त, 2019 को एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।

इस दौरान कोर्ट ने दुर्घटना पीड़ित परिवार को दिए गए मुआवजे को चुनौती देने वाली एक बीमा कंपनी द्वारा दायर अपील को खारिज कर दियाष साथ ही कहा कि यह सर्वविदित है कि मोटर दुर्घटना दावों से संबंधित मामले में, दावेदारों को मामले को साबित करने की जरूरत नहीं है। आपराधिक मुकदमे में ऐसा करना आवश्यक है। अदालत को इस अंतर को ध्यान में रखना चाहिए।
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बता दें कि दिवाकर एमआर मोटरसाइकिल चलाते समय नगरभावी में दुर्गापरमेश्वरी मंदिर के पास दुर्घटना का शिकार हो गए थे। दुर्घटना का कारण एक कार थी। इस हादसे के कारण निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी।  

इस मामले में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) ने दिवाकर के माता-पिता को 15,43,600 रुपये का मुआवजा दिया था। बाद में उन्होंने मुआवजा बढ़ाने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इस पर बीमाकर्ता ने हाई कोर्ट से संपर्क किया और कहा कि दुर्घटना के बारे में शिकायत में कार के बारे में उल्लेख नहीं किया गया था। बीमा कंपनी ने दावा किया कि दिवाकर की लापरवाही के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी।  इस मामले में अदालत ने बीमाकर्ता द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया साथ ही एमएसीटी द्वारा दिए गए मुआवजे को भी सही पाया और पीड़िता के माता-पिता की मुआवजा वृद्धि की अपील को भी खारिज कर दिया।

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मैसूर के दिवंगत महाराजा द्वारा भूमि हस्तांतरण की जांच को चुनौती देने वाली उप-रजिस्ट्रार की याचिका खारिज
कर्नाटक हाई कोर्ट ने मैसूर के दिवंगत महाराजा श्रीकांतदत्त नरसिम्हा राजा वोडेयार द्वारा कथित तौर पर हस्ताक्षरित एक संपत्ति के पंजीकरण के बारे में उनके खिलाफ जांच को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। ये याचिका एक उप-पंजीयक द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है।

बता दें कि दावा किया जाता है कि वोडेयार ने 10 दिसंबर 2013 को अपनी मौत से पहले 7 दिसंबर, 2013 को अलानाहल्ली गांव, कसाबा होबली, मैसूरु में 300 फीट गुणा 200 फीट की संपत्ति पर हस्ताक्षर किए थे। इसके खिलाफ उनकी पत्नी प्रमोदा देवी ने धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे अक्टूबर 2015 में बंद कर दिया गया था।

बाद में अप्रैल 2016 में, एक सरकारी कर्मचारी एचएस चेलुवाराजू ने तत्कालीन उप-पंजीयक रामप्रसाद आर पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए लोकायुक्त के पास शिकायत दर्ज की। इस पर वरिष्ठ उप-पंजीयक ने इसे कर्नाटक राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण (केएसएटी) के समक्ष चुनौती दी। जिसने लोकायुक्त द्वारा जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इस पर उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया। जस्टिस जी नरेंद्र और सीएम पूनाचा की पीठ ने हाल ही में सुनाए गए अपने फैसले में उनकी याचिका खारिज कर दी। 
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