बोर्ड मेंबर में भी नहीं है महिलाओं की धमक
महिलाओं के कंपनियों में कामकाज से लेकर उनके अधिकार, वेतनमान के बाद बात होती है बोर्ड मेंबर में उनकी धमक की। धीरे-धीरे महिलाओं की स्थिति में सुधार हो रहा है। क्रेडिट स्विस की एक रिपोर्ट के मुताबिक बोर्ड मेंबर में महिलाओं की संख्या नगण्य है। 2015 में भारतीय कंपनियों में 11.2 फीसदी महिलाओं को बोर्ड का सदस्य बनाया गया जो 2010 के मुकाबले दोगुना था। बता दें कि 2013 में सरकार ने एक नियम बनाया था जिसके बाद सूचीबद्ध कंपनियों के बोर्ड में कम से कम एक महिला सदस्य अनिवार्य कर दी गई थीं।
महिलाओं को निदेशक बनाए जाने के विषय में एसबीआई की पूर्व अध्यक्ष अरुंधति भट्टाचार्य ने एक साक्षात्कार में कहा था कि जिस कंपनी की निदेशक पद पर महिलाएं हैं वो ज्यादा बेहतर फैसले ले सकती हैं, क्योंकि महिलाओं का दृष्टिकोण काफी व्यापक होता है।
कई कंपनियों में स्वतंत्र निदेशक के तौर पर काम कर रहीं भारत में एचएसबीसी की पूर्व प्रमुख नैना लाल किदवई के अनुसार धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है और इसमें भी पुरुषों की जिम्मेदारी अहम है। लेकिन भारत में महिलाओं की बोर्ड मेंबर के तौर पर भागीदारी नहीं होने की बड़ी वजह पारिवारिक स्वामित्व वाली कंपनियों का बहुतायत में होना है। शायद यही वजह है कि नैना ने कहा था कि भारत एक पुरुष प्रधान सोच वाला समाज है जहां खानदानी व्यवसाय में महिलाओं को महत्व नहीं दिया जाता है। क्योंकि हमारे समाज में आज भी बेटा ही परिवार के बिजनेस का उत्तराधिकारी होता है। लेकिन धारणाएं बदल रही हैं।
ऊंचे पदों पर आसीन महिलाओं की बात करें तो 2014 में यह आंकड़ा 7.8 फीसदी था जो कि 2016 में घटकर 7.2 रह गया था। अगर दुनियाभर में ऊंचे पदों पर महिलाओं की स्थिति की बात करें तो महज 13.8 फीसदी महिलाएं ही ऐसे पदों पर आसीन हैं।
भारत में हर साल करीब एक करोड़ लोग नौकरी के लिए बाजार में उतर रहे हैं उसमें करीब आधी महिलाएं हैं। शादी के बाद घर की जिम्मेदारियों के बीच अगर महिलाएं काम करना जारी रखेंगी तभी महिलाओं के आंकड़ों में बदलाव हो सकेगा।
कई कंपनियां करती हैं महिलाओं को कम भुगतान
जहां तक महिलाओं को कम वेतन दिए जाने की बात है तो कॉर्न फेरी के रिवॉर्ड्स और बेनिफिट सॉल्यूशंस के प्रमुख बॉब वेसेल कैंपर ने कहा, "अभी भी कई कंपनियां हैं जो महिलाओं को समान भूमिका ( जॉब प्रोफाइल ) के लिए कम भुगतान करती हैं। हालांकि औसत की बात करें तो जब हमने एक ही नौकरी में महिलाओं और पुरुषों की तुलना की, तो अंतर काफी कम हो गया है। "
भारत में स्त्री- पुरुष के वेतन में चीन से अधिक अंतर
भारत में स्त्री-पुरुष के वेतन में अंतर चीन से अधिक है, जो कि 12.1 फीसदी पर है। ब्राजील में वेतन का अंतर 26.2 फीसदी, फ्रांस में 14.1 फीसदी, जर्मनी में 16.8 फीसदी, ब्रिटेन में 23.8 फीसदी और अमेरिका में 17.6 फीसदी है।