दीपावली से पहले और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रूस यात्रा पहले भारत के दोनों हाथ में लड्डू आए हैं। चीन से रिश्ते सुधारने में भारत को एतिहासिक कामयाबी मिली है। चीन ने भी भारत के साथ समझौते पर सहमति जता दी है। इस समझौते के बाद चार साल से अधिक समय तक भारतीय भू-भाग पर काबिज रहने वाली दोनों देशों की सेना अब पीछे हटेगी। दोनों देशों के सुरक्षा बल वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 2020 की स्थिति में गश्त करेंगे। रूस के कजान शहर में ब्रिक्स देशों के शिखर सम्मेलन(22-23 अक्तूबर) से पहले बनी इस सहमति को द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जिनपिंग, मोदी और पुतिन की तिकड़ी देगी नया संदेश
विदेश मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत-चीन के बीच बनी इस सहमति में पर्दे के पीछे से रूस का बड़ा सहयोग है। इससे क्षेत्र में एक नए क्षेत्रीय गठजोड़ का संदेश जाएगा और अमेरिका को भी मिर्ची लगनी तय है। माना जा रहा है कि गर्मजोशी भरे दौर में अब राष्ट्रपति शी जिनपिंग, राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी आपस में हाथ ही नहीं अब दिल भी मिलाएंगे। चीन के विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार वांग यी, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और रूस के विदेश मंत्री सर्गेर्ई लावरोव भी आने वाले समय में बड़ा संदेश दे सकते हैं।
बीते दिन विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने प्रधानमंत्री की रूस के कजान शहर की यात्रा को लेकर जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि प्रधानमंत्री की कुछ देशों के शिखर नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि चीन और भारत के बीच में बनी इस सहमति के बाद अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय चर्चा कर सकते हैं। हालांकि चीनी राष्ट्रपति के साथ पीएम मोदी की द्विपक्षीय बैठक को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इसके अलावा, आज प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन के साथ भी द्विपक्षीय चर्चा की है। इसके अलावा भारत, चीन, रूस के बीच में बने फोरम आरआईसी(रूस, इंडिया, चीन) की बैठक होने की भी पूरी संभावना है। बताते चलें कि 2020 से भारत और चीन के बीच में तनाव भरे माहौल के कारण यह बैठक स्थगित चल रही है।
कल शाम तक वापस आ जाएंगे पीएम
विदेश सचिव ने प्रेस कांफ्रेंस में पीएम मोदी की यात्रा का कार्यक्रम भी बताया था। उन्होंने बताया था कि 24 अक्टूबर को भी ब्रिक्स की बैठक जारी रहेगी। हालांकि प्रधानमंत्री 23 अक्तूबर को अपना दौरा पूरा करके लौट आएंगे।
भारत के संयम, संतुलन और राजनीतिक प्रतिबद्धता किया चीन को पीछे हटने पर मजबूर
गलवां घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच में खूनी झड़प के बाद दोनों के देशों के रिश्ते तनाव के दौर में प्रवेश कर गए थे, लेकिन रक्षा मंत्रालय जनरल और विदेश मंत्रालय के कूटनीतिज्ञों ने एक शानदार रणनीति अपनाई। भारत ने संयम, संतुलन और राजनीतिक प्रतिबद्धता को बनाए रखा। भारत ने बिना चीन से कोई सैन्य टकराव, उकसावे की कार्रवाई किए वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास भारी भरकम फ्रंट लाइन सैन्य तैनाती की। इसमे टैंक, फाइटरजेट, तोप, बोट सबकुछ रहे। चीन को सीमा पर ही रोके रखा और कूटनीतिक स्तर पर हर प्रयास को जारी रखा। 2020 से लगातार विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन को अंतरराष्ट्रीय समझौता, सहमति की याद दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिखर नेता के तौर पर लगातार अपने संयम को बनाए रखा।
चीन से सहमित के बाद अब आगे क्या?
यह एक बड़ा सवाल है। अभी विदेश मंत्रालय से यह जानकारी शेष है कि इस सहमति का स्तर क्या है? डेपसांग और डेमचोक जैसे क्षेत्र से चीन की सेना के पीछे हटने की शर्त क्या है? लेकिन अब भारत चीन के बीच में आपसी सहयोग, समन्वय और कारोबार के क्षेत्र में हर रिश्ते को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। भारत, चीन और रूस की इस तिकड़ी के इससे मजबूत होने का संदेश जाएगा। इसका असर पूरी दुनिया की भू-राजनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। हालांकि विदेश मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार रंजीत कुमार कहते हैं कि भारत की नीति किसी भी पक्ष में न रहने की रही है। पूर्व राजनयिक एस के शर्मा भी कहते हैं कि भारत हमेशा बहु ध्रुवीय दुनिया का पक्षधर रहा है। भारत ने कभी भी खुद को किसी ध्रुव के साथ एक तरफा रहने से दूरी बनाई है। शर्मा कहते हैं कि इससे कोई इनकार नहीं किया जा सकता है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2024 से पहले भारत और चीन के बीच में बनी सहमति काफी महत्वपूर्ण है। इस सहमति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। इसे भारतीय कूटनीति की भी बड़ी कामयाबी माना जाएगा।
ब्रिक्स 2024 से निकलने वाले संदेश को समझिए
ब्रिक्स 2024 में ईरान के शिखर नेता भी पहुंचे हैं। चीन और भारत के बीच में लद्दाख में चल रहे एक बड़े गतिरोध को सौहार्दपूर्ण स्वरुप देने का माहौल बना है। ईरान के शिखर नेता से रूस और चीन के नेता कजान शहर में मिलकर द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय हालात पर चर्चा कर सकते हैं। गौरतलब है कि ईरान और इस्राइल के बीच में इस समय तनाव शीर्ष पर है। रूस यूक्रेन के साथ सैन्य संघर्ष में उलझा है। यूरेशिया और मध्य पूर्व एशिया में युद्ध के इस हालात ने पूरी दुनिया के विकासशील और विकास के लिए संघर्ष कर रहे देशों के सामने अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा को बचाए रखने के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। इस स्थिति में ब्रिक्स 2024 के शिखर सम्मेलन में इसके सदस्य देशों के शिखर नेताओं की गर्मजोशी भरी तस्वीर अपने आप में एक बड़ा संदेश होगी।