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जलवायु परिवर्तन : शोधकर्ताओं ने गंगा में अत्यधिक प्रवाह और बाढ़ की घटना में वृद्धि की भविष्यवाणी की

Fri, 19 Nov 2021 03:36 AM IST
Kuldeep Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शोधकर्ताओं ने ऋषिकेश तक अपर गंगा बेसिन (यूजीबी) का अध्ययन किया। बढ़ती मानवीय गतिविधियों का नदी पर पहले से ही गंभीर प्रदूषण से लेकर इसके मार्ग में बदलाव तक विनाशकारी प्रभाव पड़ा है। जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित अध्ययन इस बात की पुष्टि करता है कि जलवायु परिवर्तन और बांध बनाने जैसी मानवीय गतिविधियाँ इस क्षेत्र को कैसे प्रभावित करती हैं।
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Bihar flood - फोटो : PTI
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विस्तार
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भारतीय विज्ञान संस्थान और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-कानपुर के एक नए अध्ययन में गंगा बेसिन से अधिक बाढ़ आने के संकेत मिले हैं क्योंकि मानव गतिविधियां और जलवायु परिवर्तन इसके जल प्रवाह को बदल रहे हैं। शोधकर्ताओं ने ऋषिकेश तक अपर गंगा बेसिन (यूजीबी) का अध्ययन किया। बढ़ती मानवीय गतिविधियों का नदी पर पहले से ही गंभीर प्रदूषण से लेकर इसके मार्ग में बदलाव तक विनाशकारी प्रभाव पड़ा है।

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जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित अध्ययन इस बात की पुष्टि करता है कि जलवायु परिवर्तन और बांध बनाने जैसी मानवीय गतिविधियाँ इस क्षेत्र को कैसे प्रभावित करती हैं। भागीरथी और अलकनंदा दो महत्वपूर्ण सहायक नदियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, पर्वतीय क्षेत्रों पर पिछली मानव गतिविधि के प्रभावों का विश्लेषण करती है, जो गंगा बनाने के लिए देवप्रयाग में विलीन हो जाती हैं।
 

भागीरथी, गंगोत्री पश्चिमी सहायक नदी ग्लेशियर से निकलती हैं और पूर्वी सहायक नदी, अलकनंदा, सतोपंथ ग्लेशियर से शुरू होती है। देवप्रयाग में दोनों सहायक नदियाँ मिलकर गंगा का निर्माण करती हैं। भागीरथी बेसिन में चार बांध 2010 से पहले काम करना शुरू कर दिया था, जबकि अलकनंदा बेसिन में दो बांध 2015 के बाद शुरू हुए थे।

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अलकनंदा बेसिन ने पानी के प्रवाह की दर में वृद्धि के साथ 1995 से 2005 तक पानी के प्रवाह को दोगुना करने का अनुभव किया है, जिसे चरम प्रवाह कहा जाता है। शोधकर्ताओं ने इन चरम प्रवाह की भयावहता में वृद्धि और गंगा बेसिन में बाढ़ आने जैसी घटनाओं की भविष्यवाणी की है।
 

इंटरडिसिप्लिनरी सेंटर फॉर वॉटर रिसर्च और भारतीय विज्ञान संस्थान में पोस्टडॉक्टरल फेलो और अध्ययन के प्रमुख लेखक सोमिल स्वर्णकार ने कहा, हमने देखा कि अलकनंदा बेसिन में भागीरथी बेसिन के विपरीत, उच्च, सांख्यिकीय रूप से बढ़ती वर्षा की प्रवृत्ति है। अधिकांश इन प्रवृत्तियों में से अलकनंदा के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में देखा गया था। इसलिए हमने इन क्षेत्रों में अत्यधिक प्रवाह की भयावहता में भी वृद्धि देखी है।

 

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