केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव (फाइल फोटो)
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जलवायु परिवर्त पूरी दुनिया के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। इससे निपटने के लिए भारत व अमेरिका ने 'स्वच्छ ऊर्जा एजेंडा-2030' बनाया है। इसके तहत जलवायु कार्रवाई एवं वित्तीय संग्रहण संवाद (सीएएफएमडी) की दिल्ली में शुरुआत हुई। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे संबोधित करते हुए कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन से निपटने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। संवाद में अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत जान एफ केरी हिस्सा ले रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री यादव ने इस संवाद में शिरकत करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच इस साझेदारी से पर्यावरण का नुकसान रोकने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। इस भागीदारी के तहत आज से शुरू हुआ यह संवाद दोनों देशों के वित्तपोषण पहलुओं को रेखांकित करते हुए जलवायु परिवर्तन पर सहयोग बढ़ाने का अवसर देगा। भारत पहले से ही वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिए एक आकर्षक ठिकाना है।
केरी ने दिया तत्काल कदम उठाने पर जोर
अमेरिकी राष्ट्रपति के दूत जॉन केरी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। इसके ज्यादा विनाशकारी परिणामों से बचने के लिए जल्द कार्रवाई आवश्यक है। बाढ़, जंगल की आग, रिकॉर्ड तोड़ बारिश हर जगह हो रही है। तापमान गर्म होने के संबंध में 1.5 डिग्री की सीमा को बनाए रखने और अधिक विनाशकारी परिणामों से बचने के लिए, हमें अभी और काम करना चाहिए। ऊर्जा के बदलते क्षेत्र में निवेश करने का यह अच्छा समय है।
जॉन केरी ने सोमवार को ऊर्जा मंत्री आरके सिंह से भी मुलाकात की। केरी 12 से 14 सितंबर तक भारत की यात्रा पर हैं। इस दौरान वे भारत के सरकारी और निजी क्षेत्र के शीर्ष पदाधिकारियों से मिलकर भारत में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ावा दिए जाने के मुद्दे पर तेजी से काम करने पर चर्चा करेंगे।
बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अप्रैल 2021 में पर्यावरण पर शिखर सम्मेलन में भारत-अमेरिका जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा एजेंडा 2030 साझेदारी की पहल की थी। केरी की भारत यात्रा से ब्रिटेन के ग्लासगो में 31 अक्तूबर से 12 नवंबर, 2021 तक होने वाले, संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन आन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) के पक्षों के 26वें सम्मेलन से पहले अमेरिका के द्विपक्षीय और बहुपक्षीय जलवायु प्रयासों को बढ़ावा मिलेगा।