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दावा: कोयले से बिजली उत्पादन बढ़ाया तो दिल्ली के 5200 नागरिक समय से पहले ही मर जाएंगे

Thu, 30 Sep 2021 06:33 AM IST
योगेश साहू एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

विश्व के प्रमुख शहरों पर वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव बताती अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। इसके अनुसार भारत में 12 प्रतिशत थर्मल पावर (कोयले से बिजली) उत्पादन राष्ट्रीय राजधानी के 500 किमी दायरे में हो रहा है। 
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दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत में कोयले से 64 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना लागू हुई, तो इससे बढ़ा वायु प्रदूषण एक दशक में अकेले दिल्ली में 5,280 नागरिकों की समय पूर्व मृत्यु का कारण बनेगा। इसके अलावा, 8,360 बच्चों का समय पूर्व जन्म हो सकता है, जिससे वे पूरी तरह विकसित नहीं होंगे। 10,310 अस्थमा रोगियों को भी इस वजह से अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। ये दावे नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में किए गए हैं। 

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मौजूदा राष्ट्रीय योजना के अनुसार साल 2020 से 2030 तक कोयले से बिजली उत्पादन 28 प्रतिशत तक बढ़ाया जाना है। सी40 सिटीज नाम विश्व के प्रमुख शहरों के नेटवर्क की इस रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के कई घातक परिणामों को बताया गया है। इसके अनुसार भारत में 12 प्रतिशत थर्मल पावर (कोयले से बिजली) उत्पादन राष्ट्रीय राजधानी के 500 किमी दायरे में हो रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुरक्षित मानकों से दिल्ली पहले ही नौ गुना और राष्ट्रीय मानकों से दो गुना अधिक प्रदूषित है। 

असर सेहत पर

  • 8,360 बच्चों का समय पूर्व जन्म होगा
  • 10,000 अस्थमा पीड़ित होंगे अस्पताल में भर्ती

असर जेब पर

  • 62,288 करोड़ खर्च होंगे इस प्रदूषण से सेहत को हुए नुकसान की वजह से
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आंकड़ों में दिखाए हालात और समाधान

  • 3,770 जीवन-वर्ष किसी न किसी अपंगता के साथ व्यतीत करने होंगे
  • 55 लाख दिनों के लिए बीमार रहेगी दिल्ली में रहने वाली कुल आबादी
  • 2.26 लाख नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं
  • 59,00,000 बच्चों का जन्म साल 2019 में समय से पूर्व हुआ

यह भी सामने आया

  • 78% कमी इसमें लाई जा सकती थी, अगर केवल दक्षिण एशिया और सब-सहारा अफ्रीकी देशों में वायु प्रदूषण घटाया जाता।
  • 1.5 करोड़ बच्चों के जन्म पर प्रदूषण बड़ा असर डाल रहा है।
  • 90% आबादी बाह्य वायु प्रदूषण के साथ जी रही, डब्ल्यूएचओ के अनुसार।
  • 50% आबादी घरेलू वायु प्रदूषण से प्रभावित है, संगठन के ही अनुसार।
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एक अन्य रिपोर्ट में दावा

एक अन्य रिपोर्ट कैलिफोर्निया सैन फ्रांसिस्को विश्वविद्यालय और वॉशिंगटन विश्वविद्यालय ने जारी की, जिसमें दावा किया गया कि वायु प्रदूषण से 2019 में पूरी दुनिया में 30 लाख बच्चे सामान्य से कम वजन के साथ पैदा हुए।
  • 30 लाख बच्चे कम वजन के साथ जन्में विश्व में
  • 204 देशों के हालात का आकलन
  • 204 देशों के हालात का आकलन करते हुए दी गई इस रिपोर्ट के अनुसार पीएम 2.5 प्रदूषक तत्व गर्भवती महिलाओं में गर्भावस्था की अवधि को भी घटा रहे हैं।
  • रिपोर्ट में उल्लेखनीय तथ्य यह भी था कि खाना बनाने के स्टोव को दो-तिहाई घरेलू प्रदूषण की वजह बताया गया। इससे पहले इन्हीं अध्ययनकर्ताओं ने दावा किया था कि विश्व में पांच लाख नवजात वायु प्रदूषण की वजह से जन्म लेते ही मारे जा रहे हैं।
  • ताजा दावा किया कि वायु प्रदूषण के स्तर में कमी लाकर इन मौतों को घटाया और बच्चों की सेहत को सुधारा जा सकता है।
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