भारत में कोयले से 64 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना लागू हुई, तो इससे बढ़ा वायु प्रदूषण एक दशक में अकेले दिल्ली में 5,280 नागरिकों की समय पूर्व मृत्यु का कारण बनेगा। इसके अलावा, 8,360 बच्चों का समय पूर्व जन्म हो सकता है, जिससे वे पूरी तरह विकसित नहीं होंगे। 10,310 अस्थमा रोगियों को भी इस वजह से अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। ये दावे नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में किए गए हैं।
मौजूदा राष्ट्रीय योजना के अनुसार साल 2020 से 2030 तक कोयले से बिजली उत्पादन 28 प्रतिशत तक बढ़ाया जाना है। सी40 सिटीज नाम विश्व के प्रमुख शहरों के नेटवर्क की इस रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के कई घातक परिणामों को बताया गया है। इसके अनुसार भारत में 12 प्रतिशत थर्मल पावर (कोयले से बिजली) उत्पादन राष्ट्रीय राजधानी के 500 किमी दायरे में हो रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुरक्षित मानकों से दिल्ली पहले ही नौ गुना और राष्ट्रीय मानकों से दो गुना अधिक प्रदूषित है।
असर सेहत पर
- 8,360 बच्चों का समय पूर्व जन्म होगा
- 10,000 अस्थमा पीड़ित होंगे अस्पताल में भर्ती
असर जेब पर
- 62,288 करोड़ खर्च होंगे इस प्रदूषण से सेहत को हुए नुकसान की वजह से