सीजेआई ने कहा कि हमने व्यापक मंच तैयार किया है, जहां हमने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के रूप में विचार के लिए देश के शीर्ष 50 न्यायाधीशों का मूल्यांकन किया है।
देश के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने इस बात पर अफसोस जताया है कि विभिन्न अंतरराष्ट्रीय समितियों में सभी भारतीय मध्यस्थों में से 10 प्रतिशत से भी कम महिलाएं हैं। साथ ही इस स्थिति को विविधता के लिहाज से एक विरोधाभास करार दिया।
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चीफ जस्टिस ने बृहस्पतिवार को संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार विधि आयोग के दक्षिण एशिया सम्मेलन को संबोधित करते हुए इसकी सराहना की कि विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ संस्थान क्षेत्रीय स्तर पर मध्यस्थों की विविध समितियां तैयार कर रहे हैं। साथ ही जोड़ा कि इन समितियों में लैंगिक असमानता को नजरअंदाज करना मुश्किल है। उन्होंने कहा, हम उस चीज का सामना कर रहे हैं जो विविधता के लिहाज से विरोधाभास है। यानी हमारे घोषित उद्देश्यों और वास्तविक नियुक्तियों में मेल नहीं है।
जजों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम के पास तथ्यात्मक डाटा न होने की बात गलत
देश के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को कहा कि यह कहना गलत होगा कि सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम के पास शीर्ष अदालत और हाईकोर्टों में जजों की नियुक्ति के संदर्भ में संभावित नामों के मूल्यांकन के लिए अपेक्षित तथ्यात्मक डेटा का अभाव है। सीजेआई ने राम जेठमलानी स्मृति व्याख्यान में कहा कि कोलेजियम ने एक व्यापक मंच तैयार किया है जिसमें उसने देश के शीर्ष 50 जजों का मूल्यांकन किया है। शीर्ष अदालत के न्यायाधीशों के तौर पर नियुक्ति के लिए इनके नामों पर विचार किया जा सकता है।
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जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, हमारा उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के लिए न्यायाधीशों के चयन के लिए वस्तुनिष्ठ मानदंड निर्धारित करना है। उन्होंने कहा, अक्सर लोग आते हैं और अपने विचार रखते हैं। लेकिन जब वे कमान अगले व्यक्ति को सौंप देते हैं तो भूल जाते हैं। अदालतों को संस्थागत बनाने से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है।