एससीओ सदस्य देशों के सर्वोच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों/अध्यक्षों की 18वीं बैठक में अपने समापन भाषण में सीजेआई ने अदालती प्रक्रियाओं को सरल और अधिक सुलभ बनाने के लिए सामूहिक रूप से नए तंत्र को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने जोर देकर कहा है कि शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों को न्यायिक सहयोग के लिए प्रयास करना चाहिए, ताकि आम लोगों के लिए अपनी न्यायिक प्रणाली को और अधिक सुलभ बनाया जा सके।
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आयोजित एससीओ सदस्य देशों के सर्वोच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों/अध्यक्षों की 18वीं बैठक में अपने समापन भाषण में सीजेआई चंद्रचूड़ ने अदालती प्रक्रियाओं को सरल और अधिक सुलभ बनाने के लिए सामूहिक रूप से नए तंत्र को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने एससीओ सदस्य राज्यों में न्यायिक प्रणाली के सामने आने वाली कई चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इन मुद्दों को आपसी सहयोग, अनुभवों और ज्ञान को साझा करके सुलझाया जाना चाहिए।
दो दिवसीय संयुक्त बातचीत सत्र में एससीओ के सदस्यों में चीन, भारत, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हुए। अफगानिस्तान, बेलारूस, ईरान और मंगोलिया एससीओ पर्यवेक्षकों के तौर पर जबकि आर्मेनिया, अजरबैजान, कंबोडिया और नेपाल बतौर एससीओ संवाद भागीदार इसमें शामिल हुए। सीजेआई चंद्रचूड़ के अलावा सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ ने भी विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखी।