सुप्रीम कोर्ट भी अब राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रिड (एनजेडीजी) से जुड़ गया। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने बृहस्पतिवार को इसका एलान किया। अब एक क्लिक से लंबित मामलों और निपटारा किए गए मुकदमों की वास्तविक स्थिति की जानकारी, वर्षवार पंजीकृत और गैर पंजीकृत लंबित मामले, कोरम वार तय किए मामलों की संख्या का पता चल सकेगा।
एनजेडीजी ई-कोर्ट परियोजना के तहत एक ऑनलाइन मंच के रूप में बनाए गए जिला और अधीनस्थ न्यायालयों और उच्च न्यायालयों के आदेशों, निर्णयों और मामलों के विवरण का एक डाटाबेस है। अभी तक उच्च न्यायालय स्तर का ही डाटा उपलब्ध था। सीजेआई ने कहा, शीर्ष अदालत का डाटा वास्तविक समय के आधार पर एनजेडीजी पर अपलोड किया जाएगा। इससे न्यायिक क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष 583 मामले लंबित
सीजेआई ने कहा, 583 मामले तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष लंबित हैं। जल्द ही इनकी सुनवाई के लिए पीठ का गठन किया जाएगा। आंकड़ों से पता चला कि 288 मामले पांच न्यायाधीशों की पीठ, 21 मामले सात न्यायाधीशों की पीठ और नौ न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष कुल 135 मामले लंबित हैं।
18,735 न्यायालयों का डाटाबेस है एनजेडीजी
एनजेडीजी 18,735 जिला और अधीनस्थ न्यायालयों और उच्च न्यायालयों के आदेशों, निर्णयों और मामले के विवरण का एक डाटाबेस है। आंकड़ों के अनुसार, शीर्ष अदालत में 80,501 मामले लंबित हैं। इनमें से 62,946 सिविल और 17,555 आपराधिक मुकदमे हैं। इस साल सुप्रीम कोर्ट में 37,777 मामले दायर हुए और 36,164 का निपटारा हो चुका है।
न्याय वितरण प्रणाली में होगी वृद्धि
शीर्ष कोर्ट की इस पहल को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का यह कदम सराहनीय है। प्रौद्योगिकी के इस तरह के इस्तेमाल से पारदर्शिता बढ़ेगी और हमारे देश में न्याय वितरण प्रणाली में वृद्धि होगी।
नागरिकों के अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध
वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि नागरिकों की ओर से पीएम और सीजीआई का आभार। हम भाग्यशाली हैं कि हमारे पास ऐसे अनुकरणीय गुण और नगरिकों के प्रति प्रतिबद्धता वाले लोग हैं। नागरिकों के अधिकारों को बनाए रखने के लिए दोनों ही समर्पित, जुनूनी और प्रतिबद्ध हैं।