सीआईएसएफ में याचिकाकर्ता दिवाकर पांडे एवं अन्य के मामले में यह फैसला सुनाया गया है। अदालत के समक्ष कहा गया है कि इंस्पेक्टर से सहायक कमांडेंट बनने में लंबा वक्त लग रहा है। पदोन्नति में ठहराव आ गया है। सरकार की तरफ से पदोन्नति न होने का एक कारण यह भी बताया गया कि सहायक कमांडेंट की वैकेंसी कम हैं, इसलिए इंस्पेक्टर की पदोन्नति में 19 से 20 साल का वक्त लग रहा है। नियमानुसार, पांच साल में इंस्पेक्टर, पदोन्नति के लायक हो जाता है।
सरकारी पक्ष के वकीलों ने कहा, कैडर रिव्यू हो रहा है। तीन सप्ताह में यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि यूपीएससी/डीओपीटी के नियमों के अनुसार, इस प्रक्रिया को पूरा किया जाए। यूपीएससी/डीओपीटी द्वारा इस संबंध में समय-समय पर कार्यालय ज्ञापन जारी किए जाते हैं। पदोन्नति के मामले में इतना लंबा ठहराव, नजरअंदाज नहीं कर सकते। रेस्पोंडेंट के जरिए एग्जीक्यूटिच कैडर में सीआईएसएफ को कहा गया है कि वह पदोन्नति के नए रास्ते खोजें। चार माह के अंदर यह काम पूरा करो। इसके बाद भी कोई परेशानी आती है तो हमें बताएं। इस मामले में संसदीय कमेटी की रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है।