परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की सदस्यता के मुद्दे पर चीन का अड़ंगा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट नमामि गंगे योजना की गति पर भी असर डाल सकता है। केंद्र सरकार इस महत्वाकांक्षी योजना में परमाणु ऊर्जा की नई तकनीक का इस्तेमाल करना चाहती है। इसके लिए बेहतर परमाणु तकनीक की आपूर्ति एनएसजी की सदस्यता के बाद ही हासिल हो सकती है।
वर्तमान में परमाणु ऊर्जा विभाग ने अपनी क्षमता के अनुरूप नमामि गंगे योजना में योगदान की कार्ययोजना पर काम शुरू किया है। जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए आईएनडीसी के तहत भारत की प्रतिबद्धता के लिए भी यह सदस्यता जरूरी है।
चीन का अड़ंगा भारत की क्लीन ऊर्जा मुहिम पर भी ग्रहण लगा सकता है। परमाणु ऊर्जा विभाग के सूत्रों के मुताबिक नमामि गंगे योजना में जल की गुणवत्ता के मूल्यांकन कार्य में विभाग शामिल है। गंगा के विभिन्न सेक्टर के साथ पोत परिवहन मार्गों के विकास में और डंपिंग स्थलों के मूल्यांकन भी बेहतर परमाणु ऊर्जा तकनीक अहम भूमिका निभा सकती है।
एनएसजी की सदस्यता से बेहतर परमाणु ऊर्जा तकनीक हासिल कर नमामि गंगे योजना में तकनीक उपलब्धता और तकनीक सलाहकार के रूप में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सहायता और आसान हो जाएगी।
जलवायु परिवर्तन के खतरों के निपटने के लिए भारत ने 40 प्रतिशत क्लीन ऊर्जा का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए 2032 तक 63000 मेगावाट परमाणु ऊर्जा का उत्पादन तभी संभव है जब ईंधन का आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
नए परमाणु संयंत्रों की स्थापना के लिए परमाणु सामग्री और तकनीक की आपूर्ति में एनएसजी की सदस्यता सहायक होगी। अभी देश में 5780 मेगावाट परमाणु ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। निर्माणाधीन प्रोजेक्टों के पूरा होने पर 2019 तक उत्पादन 10080 मेगावाट होने की संभावना है।