सार
बच्चों में दोबारा कोविड-19 का संक्रमण नजर आ रहा है। बड़ी संख्या में ऐसे मामले हैं, जिन्हें एक बार कोविड हो गया है और वे फिर से दूसरी बार कोविड संक्रमित हो रहे हैं। जो बच्चे जनवरी या अप्रैल में संक्रमित हुए थे, वे एक बार फिर कोरोना पॉजिटिव हो रहे हैं।
देश में एक बार फिर बच्चों में कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है। जो बच्चे जनवरी या अप्रैल में संक्रमित हुए थे, वे फिर महामारी की चपेट में आ रहे हैं। हालांकि, संक्रमण हल्का होने से उनका घरों में ही इलाज किया जा सकता है। इसके अलावा मौसमी रोग जैसे वायरल फीवर व डेंगू, मलेरिया आदि भी बच्चों को निशाना बना रहे हैं।
मधुकर रेनबो चिल्ड्रन हॉस्पिटल दिल्ली के निदेशक के डॉ. नितिन वर्मा ने कहा कि बच्चों में दोबारा कोविड-19 का संक्रमण नजर आ रहा है। मेरे पास बड़ी संख्या में ऐसे मामले हैं, जिन्हें एक बार कोविड हो गया है और वे फिर से दूसरी बार कोविड संक्रमित हो रहे हैं। जो बच्चे जनवरी या अप्रैल में संक्रमित हुए थे, वे एक बार फिर कोरोना पॉजिटिव हो रहे हैं। यदि यह कोरोना का अलग स्ट्रेन है तो इससे वैक्सीन से बचाव नहीं हो सकेगा। संभवत: इसी कारण बच्चे दूसरी बार संक्रमित हो रहे हैं।
डॉ. वर्मा के अनुसार इन दिनों बच्चों को अन्य संक्रमण भी हो रहे हैं। कोविड चल ही रहा है। मुझे रोज चार से पांच कोविड संक्रमित बच्चे मिलते हैं। स्कूली और छोटे बच्चों में वायरल फीवर और डेंगू के भी मामले मिल रहे हैं। हाल ही में स्वाइन फ्लू के भी केस मिले। हालांकि, डॉ. वर्मा का कहना है कि बच्चों में कोविड के मिल रहे नए मामले हल्के लक्षणों वाले हैं, उनका घर पर ही ठीक से उपचार किया जा सकता है। कोविड के गंभीर मामले वयस्कों में ही ज्यादा होते हैं।
बुखार, खराश व चकत्ते के मामले
डॉ. वर्मा के अनुसार बच्चों में बुखार, गले में खराश और चकत्ते के केस ज्यादा दिख रहे हैं। कुछेक में उल्टी और दस्त के भी लक्षण होते हैं। उन्होंने कहा कि कोविड से बचाव के लिए टीकाकरण बीमारी की गंभीरता को रोकने में मदद करता है। बचाव के लिए जरूरी है कि हम आप अस्पताल या आईसीयू में न जाएं और मास्क पहने तथा हाथ धोएं और सामाजिक दूरी बनाए रखें। अधिकतर केस में स्कूलों से कोविड संक्रमण होने के हैं। इसलिए वहां के माहौल व कोविड के प्रतिकूल व्यवहार बनाए रखना जरूरी है। स्कूलों में मास्क अनिवार्य होना चाहिए और बच्चों में उचित शारीरिक दूरी बनी रहे। खाना खाते वक्त भी सावधानी जरूरी है। जब तक केस बहुत ज्यादा न हों, स्कूल बंद करने की जरूरत नहीं है।