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CJI: सीजेआई ने स्वतंत्रता संग्राम में कानूनी पेशे के लोगों के योगदान को किया याद, संसद में भागीदारी पर यह बोले

Sun, 04 Sep 2022 09:03 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर

सार

सीजेआई यूयू ललित ने इसका जवाब देते हुए कहा कि हमारा देश कानून के शासन द्वारा शासित है। जो सही है उसी की जीत होगी। यही हमारे देश का लोकाचार है जिस पर यह देश खड़ा है। न्यायपालिका इसमें कोई अपवाद नहीं है।
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सीजेआई यूयू ललित - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत की संसद में वकालत से जुड़े सांसदों की घटती संख्या पर भारत के प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित ने चिंता जाहिर की है। रविवार को उन्होंने नागपुर में महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि संसद में वकीलों का प्रतिशत घट रहा है जबकि देश के संविधान का मसौदा तैयार करने में शामिल लोगों में अधिकांश कानूनी पेशे से थे। 

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इस कार्यक्रम में बोलते हुए सीजेआई यूयू ललित कहा कि हमारे देश ने अपने स्वतंत्रता संग्राम से कानूनी प्रतिभाओं को देखा और लाभान्वित हुआ है। एक वकील को सामान्य रूप से सामाजिक समस्याओं या संवैधानिक मुद्दों के समाधान खोजने के बारे में सोचने के सही तरीके से अवगत कराया गया है। वह ऐसे मुद्दों से निपटने के लिए दूसरों की तुलना में बेहतर तरीके से सोंचते हैं, इसीलिए भारत और भारतीय समाज के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम के पुराने नेता मुख्य रूप से वकील थे। आज, संसद के दोनों सदनों में वकीलों का प्रतिशत घट रहा है। उन्होंने कहा कि न्यायिक ढांचे का पिरामिड नीचे से बड़ा होना चाहिए, जबकि देश में इस समय यह पिरामिड शीर्ष पर बड़ा है।

उन्होंने कहा कि इस समय देश में सभी प्रतिभाएं शीर्ष स्तर पर हैं, जबकि मध्य और निचले स्तर पर प्रतिभाशाली युवा और वकील नहीं आ रहे हैं। हमें न्यायिक ढांचे के निचले स्तर पर प्रतिभा संपन्न लोगों को लाना होगा। 
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कानून के छात्रों के साथ बातचीत करते हुए उनके एक सवाल, क्या न्यायपालिका सही दिशा में आगे बढ़ रही है? सीजेआई यूयू ललित ने इसका जवाब देते हुए कहा कि हमारा देश कानून के शासन द्वारा शासित है। जो सही है उसी की जीत होगी। यही हमारे देश का लोकाचार है जिस पर यह देश खड़ा है। न्यायपालिका इसमें कोई अपवाद नहीं है।उन्होंने कहा कि जब कोई मामला अदालत में आता है, तो दोषियों पर हथौड़ा पड़ना चाहिए और जिस किसी के साथ अन्याय हुआ है उसे सुरक्षा की छतरी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह न्यायपालिका का काम है और हम इसे करने का प्रयास करेंगे।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जिला न्यायाधीशों और उच्च न्यायपालिका के बीच संपर्क नहीं है इसलिए एक ऐसी प्रणाली विकसित करनी चाहिए जहां दोनों समूह मिल सकें क्योंकि इस डिस्कनेक्ट को जाना होगा। उनके संबोधन के बाद एमएनएलयू के रजिस्ट्रार रमेश कुमार चमारती ने उनका धन्यवाद ज्ञापित किया।

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