कुछ घंटों पहले ही प्रशासनिक अमले को जानकारी दी जाएगी। सीएम इन ग्रामों में उपलब्ध नागरिक सुविधाओं, शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन, शासकीय कामों, शासकीय कार्यालयों आदि का निरीक्षण करेंगे। सीएम ग्रामीणों, प्रमुख व्यक्तियों एवं जनप्रतिनिधियों से बात करेंगे और उनसे फीडबैक व सुझाव लेंगे। ऐसे में कांग्रेस विधायकों को उनके क्षेत्रों में सीएम की नाराजगी भी झेलनी पड़ सकती है।
विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि बस्तर व सरगुजा संभाग में आदिवासी समाज की कांग्रेस विधायकों के प्रति नाराजगी बढ़ रही है। इस क्षेत्र में सरकार के आश्वासनों के मुताबिक ज्यादा काम नहीं हो पाया है। वहीं समय-समय पर कांग्रेस संगठन और विधायकों के बीच आंतरिक कलह की बातें भी सामने आती रही हैं। पार्टी हाईकमान के समक्ष भी इस तरह की बातें कई बार खुलकर सामने आ चुकी हैं। कई बार देखने में आया है कि, कांग्रेस संगठन के पदाधिकारी सीधे तौर पर विधायकों पर अनदेखी का आरोप भी लगाते रहे है।वहीं वहीं कई विधायकों ने मंत्रियों के खिलाफ मोर्चा तक खोल रखा है।
विधायकों और कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ने लगी है दूरी
कांग्रेस ने विधायकों के प्रदर्शन, क्षेत्र में सक्रियता, कार्यकर्ताओं से मुलाकात, सत्ता और संगठन में तालमेल सहित अन्य मुद्दों को लेकर मार्च से पहले एक आंतरिक सर्वे कराया है, इसमें अधिकांश विधायकों की स्थिति काफी चिंताजनक मिली है। हालांकि सीएम को उम्मीद है कि चुनाव में अभी डेढ़ साल का समय है, ऐसे में विधायक पहले ही सचेत हो जाएंगे तो पार्टी को नुकसान नहीं होगा। रायपुर में मीडिया से चर्चा में सीएम भूपेश बघेल ने साफ कहा कि अभी समय रहते सुधार किया जाएगा।
प्रदेश की राजनीति पर नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में दौरे से पहले सीएम भूपेश बघेल के संकेतों के कई राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। विधायकों के रिपोर्ट कार्ड पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट इशारा कर दिया कि लगातार समीक्षा की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री के इस बयान को कांग्रेस सरकार की चिंता के रूप में देखा जा रहा है। देश में सिर्फ छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जहां कांग्रेस की मजबूत सरकार है। ऐसे में मिशन-2023 में एक बार फिर सत्ता वापसी के लिए सत्ता और संगठन में तालमेल के साथ जमीनी स्तर को मजबूत करना जरूरी है।