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कांग्रेस की बदली सियासत : 12 दिन में 112 बार राहुल गांधी ने हिंदू और हिंदुत्व का नाम लिया, बेरोजगारी और महंगाई पर कितनी बार बोले?

सार

ऐसा लगता है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी का फोकस इन दिनों हिंदू वोटर्स पर है। ये हम नहीं, आंकड़े बता रहे हैं। राहुल गांधी ने जयपुर में 'महंगाई हटाओ, भाजपा भगाओ महारैली' में हिंदू और हिंदुत्व का फर्क बताया। उसके बाद से राहुल लगभग हर रैली में ये अंतर बता रहे हैं। 
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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और सांसद राहुल गांधी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिंदू और हिंदुत्व का मुद्दा भारतीय जनता पार्टी के कोर एजेंडे में शामिल रहा है। वहीं, दूसरे दल मुस्लिम और अन्य धर्मों के वोटर्स को लुभाने के लिए हमेशा से हिंदू और हिंदुत्व का जिक्र करने से बचते रहे हैं। इस बार कुछ अलग देखने को मिल रहा है। अगले साल पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने हिंदू बनाम हिंदुत्व का मुद्दा छेड़ दिया है। 
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भले ही कांग्रेस धर्म की राजनीति से खुद को अलग रखने का दावा करती रही हो लेकिन ये आंकड़े कुछ और ही बयां कर रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 12 दिसंबर 2021 को जयपुर में महंगाई हटाओ महारैली को संबोधित किया। यहीं से उन्होंने हिंदू और हिंदुत्व की बात शुरू की। इसके बाद से 24 दिसंबर तक यानी इन 12 दिनों में राहुल गांधी ने 112 बार हिंदू और हिंदुत्व शब्द का प्रयोग अपने भाषणों और ट्विट में किया है। पढ़िए कांग्रेस की इस नई सियासत के बारे में...

जयपुर में राहुल ने क्या कहा था?

राहुल गांधी। - फोटो : अमर उजाला
जयपुर में अपने भाषण की शुरुआत करते हुए राहुल गांधी ने कहा, 'दो जीवों की एक आत्मा नहीं हो सकती, उसी तरह दो शब्दों का एक मतलब नहीं हो सकता क्योंकि हर शब्द का अलग मतलब होता है। देश की राजनीति में आज दो शब्दों की टक्कर है। दो अलग शब्दों की। इनके मतलब अलग हैं। एक शब्द हिंदू, दूसरा शब्द हिंदुत्ववादी है। यह एक चीज नहीं है। ये दो अलग शब्द हैं और इनका मतलब बिलकुल अलग है। मैं हिंदू हूं, मगर हिंदुत्ववादी नहीं हूं।'

आगे बोले, 'मैं आज मौजूद लोगों को हिंदू व हिंदुत्ववादी शब्द के बीच फर्क बताना चाहता हूं। महात्मा गांधी हिंदू थे, गोडसे हिंदुत्ववादी। फर्क क्या होता है? फर्क मैं आपको बताता हूं। चाहे कुछ भी हो जाए हिंदू सत्य को ढूंढता है। मर जाए, कट जाए, पिस जाए, हिंदू सच को ढूंढता है। उसका रास्ता सत्याग्रह है। पूरी जिंदगी वह सच को ढूंढने में निकाल देता है।'

राहुल ने कहा, 'महात्मा गांधी ने पूरी जिंदगी सच को ढूंढने में बिता दी और अंत में एक हिंदुत्ववादी ने उनकी छाती में तीन गोलियां मारीं। हिंदुत्ववादी अपनी पूरी जिंदगी सत्ता को खोजने में लगा देता है। उसे सिर्फ सत्ता चाहिए और उसके लिए वह कुछ भी कर देगा। उसका रास्ता सत्याग्रह नहीं उसका रास्ता सत्ताग्रह है।'

कांग्रेस नेता ने कहा, 'यह देश हिंदुओं का देश है, हिंदुत्ववादियों का नहीं है और आज अगर इस देश में महंगाई है दर्द है तो यह काम हिंदुत्ववादियों ने किया है। हिंदुत्ववादियों को किसी भी हालत में सत्ता चाहिए। इनका सच्चाई से कोई लेना देना नहीं। 2014 से इन लोगों का राज है हिंदुत्ववादियों का राज है हिंदुओं का नहीं और हमें हिंदुत्ववादियों को बाहर निकालना है और एक बार फिर हिंदुओं का राज लाना है।'

आंकड़े क्या कहते हैं? 

राहुल गांधी। - फोटो : अमर उजाला
12 दिसंबर से 24 दिसंबर के बीच कांग्रेस महासचिव ने तीन बड़ी रैलियों को संबोधित किया। 
  • 12 दिसंबर : जयपुर में महंगाई हटाओ रैली में राहुल गांधी शामिल हुए। वैसे तो ये रैली महंगाई पर थी, लेकिन राहुल गांधी ने इसमें केवल चार बार महंगाई शब्द का जिक्र किया। राहुल के भाषण में 10 बार बेरोजगारी और रोजगार शब्द शामिल था, जबकि 57 बार हिंदू और हिंदुत्ववादी शब्द का प्रयोग किया। 
  • 16 दिसंबर : देहरादून में विजय सम्मान रैली को राहुल गांधी ने संबोधित किया। इसमें उन्होंने रोजगार शब्द का आठ और महंगाई शब्द का दो बार जिक्र किया। यहां हिंदू और हिंदुत्व जैसे शब्दों का राहुल गांधी ने इस्तेमाल नहीं किया। 
  • 18 दिसंबर : अमेठी में महंगाई हटाओ, भाजपा भगाओ रैली में राहुल गांधी शामिल हुए। इसमें उन्होंने 44 बार हिंदू और हिंदुत्व शब्द का जिक्र किया। एक बार रोजगार शब्द का इस्तेमाल किया, जबकि महंगाई शब्द का एक बार भी प्रयोग नहीं किया। 

ट्विटर के आंकड़े क्या कहते हैं? 
राहुल गांधी ने इन 12 दिनों में 29 बार ट्वीट किया, जबकि चार बार संसद के बाहर मीडिया से रूबरू हुए। ट्विटर पर राहुल गांधी ने आठ बार हिंदू और हिंदुत्व शब्द का जिक्र किया। वहीं, रोजगार, बेरोजगारी और महंगाई शब्द का तीन बार जिक्र किया। 14 दिसंबर को संसद भवन के बाहर मीडिया से रूबरू होते हुए एक बार हिंदू शब्द का जिक्र किया। इस बीच, रोजगार, बेरोजगारी और महंगाई शब्द पर एक बार भी नहीं बोले। 
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क्यों हिंदू वोटर्स पर फोकस? 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस का अचानक से हिंदू वोटर्स पर फोकस करना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय है। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव कहते हैं, 'आजादी के बाद से कई दशक तक हिंदू वोटर्स भी कांग्रेस के साथ ही रहे, लेकिन राम मंदिर आंदोलन के बाद इसमें बंटवारा होने लगा। हिंदू वोटर्स के बीच भाजपा मजबूत होने लगी। 2014 के बाद से इसमें और बढ़ोतरी होने लगी।' 

वे कहते हैं, 'राम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, केदारनाथ मंदिर में भव्य विकास के जरिए भाजपा ने अपने पुराने मुद्दों पर काम करके दिखाया है। इससे हिंदू वोटर्स के बीच भाजपा अधिक मजबूत हुई है। दूसरी ओर आज तक कांग्रेस का फोकस मुस्लिम वोटर्स पर ज्यादा रहा। मुस्लिट वोटर्स नाराज न हों, इसलिए हमेशा से राम मंदिर व हिंदुओं के अन्य मुद्दों पर कांग्रेस कुछ भी बोलने से बचती रही है। पिछले एक दशक में कांग्रेस को ये एहसास हुआ है कि बहुसंख्यक वोटर्स को नाराज करके चुनाव नहीं जीता जा सकता है। इसलिए राहुल गांधी ने अब नए तरीके से हिंदू और हिंदुत्व का मुद्दा छेड़ा है। '

हिंदुत्व से ही भाजपा का आधार
राजनीतिक विश्लेषक अजय कुमार सिंह कहते हैं कि हिंदुत्व का मुद्दा भाजपा के लिए काफी अहम है। राम मंदिर आंदोलन से लेकर अब तक भाजपा को हिंदुत्व से ही जोड़कर देखा जाता रहा है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के चुनाव प्रचार प्रसार में भी भाजपा जोरशोर से मंदिरों का मुद्दा उठा रही है। सिंह कहते हैं, ' भले ही भाजपा ये कहती हो कि उनके लिए हिंदुत्व और मंदिर चुनावी नहीं, बल्कि आस्था का विषय है। लेकिन हकीकत सभी जानते हैं।'
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