सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय वस्तु और सेवा कर (सीजीएसटी) कानून के एक प्रावधान की व्याख्या को लेकर देश के उच्च न्यायालयों में लंबित याचिकाओं को अपने पास स्थानांतरित करने से सोमवार को इनकार कर दिया। इसके साथ ही मप्र हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ से आग्रह किया कि वह अपने पास लंबित इससे संबंधित याचिका पर दो माह में फैसला सुनाए।
सीजीएसटी का यह प्रावधान इनपुट टैक्स क्रेडिट की पात्रता से संबंधित है। केंद्र ने याचिका दायर शीर्ष कोर्ट से आग्रह किया था कि वह सारे मामले अपने पास बुला ले और फैसला ले। शीर्ष कोर्ट ने फिलहाल इससे इनकार कर दिया। प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने केंद्र का आग्रह ठुकराते हुए कहा कि पहले इस केस पर हाईकोर्ट को निर्णय कर लेने दीजिए। उसके बाद यदि केंद्र संतुष्ट नहीं हो तो शीर्ष कोर्ट में आए। हम सुनवाई करेंगे। यदि देश की विभिन्न हाईकोर्ट इस मामले में परस्पर विरोधी फैसले देती हैं तो उन्हें भी आने दें, उनकी राय का शीर्ष कोर्ट में सुनवाई के दौरान लाभ मिलेगा।
इंदौर खंडपीठ दो माह में करे निपटारा
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ से दो महीने के भीतर सीजीएसटी कानून की धारा 16 (2) की व्याख्या पर याचिका का निपटारा करने का अनुरोध किया। सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस वी राजू ने पीठ से आग्रह किया कि इसी तरह के मामलों में अन्य हाईकोर्टों को परस्पर विरोधी फैसलों देने से बचने के लिए सुनवाई आगे नहीं बढ़ाने के निर्देश दिए जाएं।
राजू ने कहा कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित ऐसे ही एक मामले को शीर्ष कोर्ट में स्थानांतरित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इससे संंबंधित 36 मामले देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में विचाराधीन हैं। इंदौर खंडपीठ में निजी कंपनी कमिंस टेक्नालॉजी इंडिया ने सीजीएसटी के उक्त प्रावधान की व्याख्या का आग्रह करते हुए याचिका दायर की है। केंद्र सरकार इसके समेत अन्य याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कराना चाहती थी।