संगठित कॉडर और गैर-संगठित कॉडर में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने सेवानिवृत्ति के नए नियम तय करने और कॉडर रिव्यू के लिए केंद्रीय कर्मियों का सर्विस प्रोफाइल मांगा है। सभी मंत्रालयों को अपने सर्विस एवं कॉडर स्टाफ का सर्विस प्रोफाइल हर हाल में 30 सितंबर तक जमा कराना होगा। इस मामले में किसी तरह की कोई देरी न हो, इसके लिए डीओपीटी ने सभी मंत्रालयों को ऑफिस 'मेमोरेंडम' भेजा है।
बता दें कि केंद्र सरकार ने अपने सभी मंत्रालयों और सुरक्षा बलों में सेवानिवृत्ति आयु घटाने का प्रपोजल तैयार किया है। बहुत से अधिकारियों और कर्मियों को यह शिकायत रही है कि उन्हें समय पर पदोन्नति नहीं मिलती। दूसरी तरफ बैकलॉग की समस्या का कोई हल नहीं निकल पा रहा था। तीसरा, नई भर्तियों को लेकर भी सरकार असमंजस में है। अगर सेवानिवृत्ति के नए नियमों को लागू किया जाता है, तो ये तीनों समस्या दूर हो सकती हैं। हालांकि इसमें वित्त मंत्रालय की मंजूरी सबसे अहम स्थान रखती है।
डीओपीटी के एक अधिकारी के मुताबिक बहुत सी सेवाएं ऐसी हैं, जो संगठित कॉडर के तहत आती हैं। लेकिन कुछ ऐसी सर्विस हैं, जिन्हें गैर-संगठित कॉडर का हिस्सा बना दिया गया था। इसके अलावा अन्य कई ऐसे रैंक हैं, जिनमें दशकों से कोई बदलाव नहीं हो सका है। नतीजा, अनेक अधिकारियों और कर्मियों को यह शिकायत रही है कि कामकाज की रिपोर्ट के आधार पर उन्हें पदोन्नति नहीं मिलती। जैसे संगठित कॉडर वालों को तय समय पर पदोन्नति मिल जाती है। इनमें आईएएस, आईएफएस और आईपीएस समेत कई दूसरी सेवाएं शामिल हैं। अंग्रेजों के शासनकाल में जो पद बनाए गए थे, वे आज तक चल रहे हैं।
सरकार की मंशा है कि कर्मियों को अब कामकाज के आधार पर पदोन्नति एवं दूसरे फायदे मिलें। रेलवे सहित अन्य विभागों में कई पद ऐसे भी हैं, जिन पर बैठे कर्मियों की न तो कामकाज रिपोर्ट बनती है और न ही उनका ड्यूटी टाइम है। एक कर्मचारी सुबह से रात तक काम पर लगा रहता है, तो दूसरा तीन चार घंटे में नौकरी पूरी कर उतना ही वेतन लेता है। वह दूसरे तरीकों से कथित तौर पर प्रमोशन भी पहले ले लेता है। सूत्र बताते हैं कि डीओपीटी ने सेवानिवृत्ति के नए नियम बनाने और कॉडर रिव्यू करने के मामले में एक कदम आगे बढ़ा दिया है।
कृषि निगम एवं किसान कल्याण विभाग, कृषि शोध एवं शिक्षा, केमिकल एंड पेट्रो केमिकल, फर्टिलाइजर, फार्मास्यूटिकल, आयुष, सिविल एविएशन, कोयला, कॉमर्स, इंडस्ट्री एवं इंटरनल ट्रेड, पोस्ट, दूरसंचार, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं जनआपूर्ति, कार्पोरेट अफेयर, संस्कृति, रक्षा, रक्षा उत्पादन, शोध एवं विकास, एक्स सर्विसमैन वेलफेयर, नॉर्थ ईस्ट रीजन, अर्थ साइंस, इलेक्ट्रानिक एवं इंर्फोमेशन तकनीक, पर्यावरण वन एवं जलवायु बदलाव, गृह मंत्रालय, इकोनोमिक अफेयर, व्यय, राजस्व, वित्तीय सेवाएं, स्वास्थ्य, शिक्षा, सूचना प्रसार, शहरी विकास, जल संसाधन, कानून एवं न्याय, माइंस, पंचायती राज, संसदीय मामले, रिन्यूएबल एनर्जी, पावर, प्राकृतिक गैस, रेलवे, विज्ञान एवं तकनीक, शिपिंग, ट्रांसपोर्ट एवं अन्य मंत्रालय शामिल हैं।