जरूरत से ज्यादा हो रहा है पानी का दोहन
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी इलाके को सूखा घोषित करने के लिए वहां होने वाली आत्महत्या की घटनाएं, महिलाएं और बच्चों की स्थिति पर भी गौर करना चाहिए। सूखा घोषित करने के लिए मानवीय पहलुओं पर भी विचार हो। सूखे पर इस निर्देश के साथ ही अदालत ने राज्यों को समय पर सूखा घोषित करने को कहा है। साथ ही केंद्र को आपदा राहत कोष के गठन का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति एनवी रमण की पीठ ने वर्ष 2009 में तैयार सूखा प्रबंधन मैन्युअल को फिर से तैयार करने के लिए कहा है। इसमें बारिश में कमी, समय से सूखा घोषित करना, सिंचाई की सुविधाएं आदि भी पैमाना होना चाहिए। साथ ही अदालत ने कहा है कि सूखे के मामले में मानवीय पहलुओं पर भी गौर करना चाहिए। प्रभावित क्षेत्रों में पलायन, आत्महत्या की घटनाएं, महिलाओं और बच्चों की स्थिति आदि पर गौर करना चाहिए।
पीठ ने कहा कि पर्याप्त मात्रा में अनाज और पानी की उपलब्धता तो जरूरी है ही लेकिन अन्य पहलुओं पर भी विचार किया जाना चाहिए। साथ ही शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को छह महीने के भीतर नेशनल डिजास्टर रेस्पांस फोर्स का गठन करने के लिए कहा है। वहीं तीन महीने के भीतर नेशनल डिजास्टर मिटिगेशन फंड का गठन करने केलिए भी कहा गया है।