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सूखे पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा 'शुतुरमुर्ग जैसा' है सरकारों का रवैया

Thu, 12 May 2016 08:17 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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जरूरत से ज्यादा हो रहा है पानी का दोहन - फोटो : Getty
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी इलाके को सूखा घोषित करने के लिए वहां होने वाली आत्महत्या की घटनाएं, महिलाएं और बच्चों की स्थिति पर भी गौर करना चाहिए। सूखा घोषित करने के लिए मानवीय पहलुओं पर भी विचार हो। सूखे पर इस निर्देश के साथ ही अदालत ने राज्यों को समय पर सूखा घोषित करने को कहा है। साथ ही केंद्र को आपदा राहत कोष के गठन का निर्देश दिया है। 
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न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति एनवी रमण की पीठ ने वर्ष 2009 में तैयार सूखा प्रबंधन मैन्युअल को फिर से तैयार करने के लिए कहा है। इसमें बारिश में कमी, समय से सूखा घोषित करना, सिंचाई की सुविधाएं आदि भी पैमाना होना चाहिए। साथ ही अदालत ने कहा है कि सूखे के मामले में मानवीय पहलुओं पर भी गौर करना चाहिए। प्रभावित क्षेत्रों में पलायन, आत्महत्या की घटनाएं, महिलाओं और बच्चों की स्थिति आदि पर गौर करना चाहिए।

पीठ ने कहा कि पर्याप्त मात्रा में अनाज और पानी की उपलब्धता तो जरूरी है ही लेकिन अन्य पहलुओं पर भी विचार किया जाना चाहिए। साथ ही शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को छह महीने के भीतर नेशनल डिजास्टर रेस्पांस फोर्स का गठन करने के लिए कहा है। वहीं तीन महीने के भीतर नेशनल डिजास्टर मिटिगेशन फंड का गठन करने केलिए भी कहा गया है।
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राष्ट्रीय योजना न बनाने पर कड़ी नाराजगी जताई

supreme court of india
पीठ ने सरकार द्वारा आपात प्रबंधन पर राष्ट्रीय योजना न बनाने को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने पाया कि वर्ष 2005 में ही कानून पारित होने के बावजूद सरकार की ओर से कुछ प्रयास नहीं किया गया। पीठ ने कहा कि हम पता है कि राष्ट्रीय योजना को स्वरूप देने में वक्त लगता है लेकिन दस वर्ष इसके लिए बहुत अधिक है। साथ ही अदालत ने हरियाणा, बिहार और गुजरात को अपने यहां सूखा घोषित न करने को शुतुरमुर्ग जैसा आचरण बताया।

अदालत ने कहा कि अगर राज्य में सूखा है तो राज्यों को घोषित करना चाहिए। ऐसा करने से उनकी छवि या प्रतिष्ठा पर कोई आंच नहीं आएगी। अदालत ने कृषि मंत्रालय को एक हफ्ते के भीतर इन तीनों राज्यों के साथ बैठक पर नए आंकड़ों के साथ सूखे पर चर्चा करने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार के इस पक्ष पर आपत्ति जताई कि सूखाग्रस्त घोषित करना राज्यों का काम है, केंद्र सरकार सिर्फ सलाह दे सकती है।

सरकार का कहना था कि संघीय व्यवस्था होने के कारण राज्य के काम में दखलअंदाजी ठीक नहीं। केंद्र के इस रुख पर पीठ ने कहा कि यह कहकर केंद्र अपने दायित्व से मुंह नहीं मोड़ सकता। अदालत ने सूखे का पता लगाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत ने यह फैसला स्वराज अभियान द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर दिया है। यह आदेश का पहला हिस्सा था। संभवत: आदेश का दूसरा हिस्सा गुरुवार को सुनाया जाएगा।
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