केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र सिंह यादव
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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र सिंह यादव का कहना है कि देश में बाघ संरक्षण मॉडल खासा कामयाब रहा है। बाघों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य चार साल पहले ही हासिल कर लिया गया है। अब सरकार शेर, डॉलफिन, तेंदुए और स्नो तेंदुए आदि पर भी ऐसा मॉडल लागू करने पर विचार कर रही है। देश चीते को लाने पर भी काम कर रहा है।
चौथी एशिया मिनिस्टीरियल कॉन्फ्रेंस के दौरान ग्लोबल टाइगर रिवकरी प्रोग्राम और बाघ संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता की समीक्षा के दौरान उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि बाघ संरक्षण के लिए प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर समुदाय महत्वपूर्ण है। भारत के बाघ संरक्षण प्रयासों में लोगों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बाघ संरक्षण के लिए वर्ष 2014 में बजट केवल 185 करोड़ था, जो अब 300 करोड़ रुपये हो गया है। नरेंद्र मोदी सरकार के दौरान देश में 14 बाघ अभयारण्य हैं। इन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता भी मिल चुकी है।
2021 में देशभर में 49 हाथियों का शिकार
इस बीच केंद्र सरकार ने एक आरटीआई के जवाब में कहा कि 2021 में शिकारियों ने देशभर में 49 हाथियों को जान से मार दिया। मामले में कानून-प्रवर्तन एजेंसियों ने 77 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) ने कहा कि सबसे अधिक शिकार असम में नौ, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तमिलनाडु में आठ-आठ और कर्नाटक-उत्तराखंड में तीन-तीन दर्ज की गईं। केरल और अरुणाचल प्रदेश दोनों में हाथियों की हत्या के दो मामले दर्ज किए गए हैं। राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, बिहार, मेघालय, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र में एक-एक मामला दर्ज किया गया है।
दरअसल, नोएडा स्थित सामाजिक और पशु अधिकार कार्यकर्ता रंजन तोमर ने डब्ल्यूसीसीबी से सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में बताया गया कि मामले में तमिलनाडु में सबसे अधिक 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद असम में 15, ओडिशा में 13, पश्चिम बंगाल में 11 लोगों को पकड़ा गया। केरल में पांच, उत्तराखंड और बिहार में चार-चार, महाराष्ट्र में तीन, मेघालय और राजस्थान में दो-दो और कर्नाटक में एक को गिरफ्तार किया गया।