केंद्र सरकार बहुत जल्द पराली जलाने की समस्या का स्थायी समाधान लेकर आएगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने शुक्रवार को राज्यसभा में बताया कि केंद्र सरकार इस समस्या से निपटने के लिए एक योजना तैयार कर रही है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल पराली के एवज में किसानों को मुआवजा देने का कोई प्रावधान नहीं है।
रूपाला ने सदन को बताया कि अनुमान के मुताबिक एक टन धान की पराली में करीब 5.5 किलो नाइट्रोजन, 2.3 किलो फॉसफोरस पेंटॉक्साइड, 25 किलो पोटाशियम ऑक्साइड और 1.2 किलो सलफर होता है। पराली के जलाने से 400 किलो कार्बन निकलता है। इससे भूमि के जरूरी तत्व खत्म हो जाते हैं साथ ही जमीन का तापमान, नमी, फासफोरस और ऑर्गेनिक तत्वों पर प्रभाव पड़ता है।