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रक्षा आधुनिकीकरण: धन का घोर संकट, सेना के फार्म और एयरफील्ड मैदान होंगे बंद, पेट्रोल-डीजल पर टैक्स बढ़ाकर जुटाएंगे धन

Wed, 19 May 2021 05:55 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रिपोर्ट के मुताबिक सेना द्वारा इस्तेमाल की जा रही लगभग 20,000 एकड़ भूमि संघ सरकार के अन्य विभागों, राज्य सरकारों और सार्वजनिक क्षेत्र को दी जा सकती है। लगभग 749 एकड़ भूमि, जिसकी लागत 2,216 करोड़ रुपये है, उसे सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए दिया जा सकता है...
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रक्षा मंत्रालय - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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रक्षा आधुनिकीकरण की खातिर केंद्र सरकार के लिए पैसे जुटाना आसान नहीं होगा। धन जुटाने के लिए केंद्र सरकार कई विकल्पों पर विचार कर रही है। पंद्रहवें वित्त आयोग की रिपोर्ट में लिखा है कि रक्षा मंत्रालय ने अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए कई सुझाव दिए हैं। इनमें सेना के फार्म बंद कर उस भूमि का इस्तेमाल व्यवसायीकरण के लिए शुरू करना, इस्तेमाल न हो रहे एयर फील्ड और कैंप लगाए जाने वाले मैदान व अधिक्रमित भूमि से भी धन जुटाया जा सकता है। भारतीय आयुध कारखानों के पास 62 हजार एकड़ जमीन है। केंद्र सरकार, इसका सौदा भी कर सकती है।

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अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ 'एआईडीईएफ' के महासचिव सी. श्रीकुमार कहते हैं, सरकार अपने चहेते उद्योगपतियों को 62 हजार एकड़ जमीन कोड़ियों के भाव देने की तैयारी कर रही है। वित्त आयोग की रिपोर्ट में रक्षा मंत्रालय के हवाले से यह बात भी कही गई है कि रक्षा आधुनिकीकरण के लिए प्रत्यक्ष करों, आयात शुल्क और पेट्रोल डीजल पर उपकर लगाना पड़ेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक सेना द्वारा इस्तेमाल की जा रही लगभग 20,000 एकड़ भूमि संघ सरकार के अन्य विभागों, राज्य सरकारों और सार्वजनिक क्षेत्र को दी जा सकती है। लगभग 749 एकड़ भूमि, जिसकी लागत 2,216 करोड़ रुपये है, उसे सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए दिया जा सकता है। इसी तरह 1,243 एकड़ भूमि रक्षा भूमि पर अधिग्रहण किया गया है, जिसमें राज्य सरकार की एजेंसियां भी शामिल हैं। इसकी अनुमानित लागत करीब 10 हजार करोड़ रुपये है।
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लगभग 8000 एकड़ में फैले कैंप वाले मैदानों और इस्तेमाल न हो रहे एयर फील्ड का व्यवसायीकरण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। लगभग 1559 एकड़ भूमि, जिसकी लागत 18,836 करोड़ रुपये हैं, का उपयोग राज्य सरकारों द्वारा किया जा रहा है। इसके लिए कार्यकरण की अनुमति प्रदान की गई है। यहां से भी धन जुटाया जा सकता है।

रक्षा मंत्रालय ने यह भी उल्लेख किया है कि रक्षा भूमि के व्यवसायीकरण से आगमों की सही वसूली के लिए सात से आठ वर्षों की कार्यावधि 'जेस्टेशन पीरियड' परिकल्पित की गई है। भूमि के व्यवसायीकरण से प्राप्त निधियां लगभग 18000 करोड़ रुपये परिकल्पित की गई हैं। इसमें दस हजार करोड़ रुपये अधिक्रमण वाली भूमि से आगमों की वसूली के द्वारा और आठ हजार करोड़ रुपये सड़कों, फ्लाइओवर एवं सड़कों के ऊपरीगामी पुलों, विमानपत्तन, रेलवे लाइन और व मेट्रो जैसी सार्वजनिक परियोजनाओं से मिल सकता है।

रक्षा मंत्रालय को वार्षिक रूप से लक्षित राशियां प्राप्त करने के लिए स्पष्ट कार्ययोजना के साथ इस अधिशेष भूमि का व्यवसायीकरण करने का प्रयास करना चाहिए, ताकि संपूर्ण आगमों का उपयोग गैर व्यपगत यानी नॉन लैप्सेबल रक्षा निधि के माध्यम से किया जा सके।

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