समय पूर्व रिटायरमेंट को दंड न माना जाए
डीओपीटी के मुताबिक, समय पूर्व रिटायमेंट देना, जबरन सेवानिवृत्ति नहीं है। इसे दंड न माना जाए। किसी भी सक्षम अथॉरिटी को यह अधिकार है कि वह किसी भी सरकारी कर्मचारी को एफआर 56(जे)/रूल्स-48 (1) (बी) ऑफ सीसीएस (पेंशन) रूल्स-1972 नियम के तहत अधिकारी व कर्मी को समय पूर्व सेवानिवृत्ति पर भेजे जाने का आदेश जारी कर सकती है। हालांकि ऐसे केस में जनहित को देखा जाता है।
ग्रुप ए और बी के लिए
ऐसे मामलों में संबंधित कर्मचारी को तीन माह का अग्रिम वेतन देकर रिटायर कर दिया जाता है। यदि कोई कर्मचारी जो ग्रुप ए और बी में तदर्थ या स्थायी क्षमता में कार्यरत है, उसने 35 साल की आयु से पहले सरकारी नौकरी ज्वाइन की हो तो उस स्थिति में कर्मी की आयु 50 साल होने पर या सेवाकाल के तीस वर्ष पूरे होने के बाद, जो भी तिथि पहले आती हो, उसे रिटायरमेंट का नोटिस दिया जा सकता है। अन्य केस में 55 साल की आयु के बाद रिटायरमेंट देने का नियम है।
ग्रुप सी के लिए
अगर कोई कर्मचारी ग्रुप सी में है और वह किसी पेंशन नियमों द्वारा शासित नहीं है, तो उसे तीस साल की नौकरी पूरी होने के बाद तीन माह का नोटिस देकर रिटायर किया जा सकता है। रूल्स-48 (1) (बी) ऑफ सीसीएस (पेंशन) रूल्स-1972 नियम के तहत किसी भी उस कर्मचारी को, जिसने तीस साल की सेवा पूरी कर ली है, उसे भी सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। इस श्रेणी में वे कर्मचारी शामिल होते हैं, जो पेंशन के दायरे में आते हैं। ऐसे कर्मियों को रिटायमेंट की तिथि से तीन माह पहले नोटिस या तीन माह का अग्रिम वेतन और भत्ते देकर सेवानिवृत्त किया जा सकता है।
पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा
डीओपीटी के आदेशों में यह भी कहा गया है कि जिन कर्मियों को समय पूर्व रिटायरमेंट पर भेजा जाएगा, उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है। वह कर्मी समय पूर्व सेवानिवृत्ति आदेश जारी होने की तिथि से तीन सप्ताह के भीतर रिप्रेजेंटेशन कमेटी के समक्ष अपना पक्ष रख सकता है। सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) 1972 के नियम 56(J) के अंतर्गत 30 साल तक सेवा पूरी कर चुके या 50 साल की उम्र पर पहुंचे अफसरों की सेवा समाप्त की जा सकती है।
संबंधित विभाग से ऐसे अफसरों की जो गोपनीय रिपोर्ट तलब की जाती है, उसमें भ्रष्टाचार, अक्षमता व अनियमितता के आरोप देखे जाते हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो अफसरों को रिटायरमेंट दे दी जाती है। ऐसे अधिकारियों को नोटिस एवं तीन महीने के वेतन-भत्ते देकर घर भेजा जा सकता है। लोकसभा सचिवालय में कार्यरत दो संयुक्त निदेशक, प्रणव कुमार और कावेरी जेसवाल को उक्त नियमों के आधार पर ही समय पूर्व रिटायरमेंट दी गई है। इनके आदेशों में तीन माह के वेतन का जिक्र किया गया है।